चित्तौड़गढ़ बिना नाम लिए राजवी का पलटवार, निर्दलीयों पर तंज; निकाय चुनाव से पहले चित्तौड़गढ़ का सियासी पारा चढ़ा

राजवी का पलटवार, निर्दलीय पर तंज और आक्या से पुराना टकराव; निकाय चुनाव से पहले चित्तौड़गढ़ भाजपा में गुटबाजी फिर सतह पर
डीएस सेवन न्यूज चित्तौड़गढ़। नगर निकाय चुनाव की दस्तक के साथ चित्तौड़गढ़ भाजपा की अंदरूनी सियासत एक बार फिर चर्चा में आ गई है। शनिवार को लंबे अंतराल के बाद चित्तौड़गढ़ पहुंचे राजस्थान के पूर्व मंत्री एवं पूर्व विधायक नरपत सिंह राजवी ने भाजपा कार्यालय में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर चुनावी तैयारियों का जायजा लिया। बैठक से पहले मीडिया से बातचीत में राजवी के तीखे तेवरों और बयानों ने स्थानीय भाजपा के भीतर चल रही खींचतान को एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया।

राजवी के सबसे चर्चित बयान ने राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा हलचल पैदा की। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि “दारू की दुकान से उठाकर राजनीति में लाया था। सोचा था जनता का काम करेगा, लेकिन अगर गरीब के कल्याण की सोच नहीं होगी तो श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विचारधारा का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।” राजवी ने भले ही किसी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक चर्चाओं में इसे चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभान सिंह आक्या पर निशाने के तौर पर देखा जा रहा है।

राजवी ने भाजपा को व्यक्ति नहीं बल्कि विचारधारा और संगठन आधारित पार्टी बताते हुए कहा कि चुनाव में टिकट किसी को भी मिले, कार्यकर्ताओं का लक्ष्य कमल के फूल को जिताना होना चाहिए। टिकट वितरण का अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व द्वारा किए जाने की बात कहते हुए उन्होंने कहा कि राय मांगी गई तो वे जीतने की संभावना रखने वाले उम्मीदवारों को लेकर निष्पक्ष सुझाव देंगे।

बगावत और निर्दलीय चुनाव लड़ने के सवाल पर भी राजवी ने अपना रुख साफ कर दिया। उन्होंने कहा कि वे भाजपा को नुकसान पहुंचाने के लिए पार्टी के खिलाफ निर्दलीय उम्मीदवार खड़ा करने की राजनीति में विश्वास नहीं रखते। उनके मुताबिक वे भाजपा के साथ पहले भी थे, आज भी हैं और आगे भी रहेंगे। चित्तौड़गढ़ विधानसभा चुनाव में भाजपा से अलग होकर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ताल ठोकने वाले चंद्रभान सिंह आक्या ने नरपत सिंह राजवी को हराया था। इसके बाद आक्या भाजपा में शामिल हुए और आज चित्तौड़गढ़ के विधायक हैं। ऐसे में राजवी का निर्दलीय उम्मीदवारों पर यह तंज महज सामान्य राजनीतिक बयान नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे पुराने राजनीतिक टकराव के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

जमीन के कारोबार को लेकर पूछे गए सवाल पर राजवी ने कहा, “मुझे यहां ना प्लॉट खरीदना है और ना प्लॉट बेचना है। इसलिए मुझे किसी से डर नहीं है। कालिका माता और सांवलिया जी से ही डरता हूं।” उन्होंने अपनी राजनीति को निजी लाभ या जमीन के कारोबार से अलग बताते हुए कांग्रेस पर भी निशाना साधा और कहा कि वे कांग्रेस की तरह मिलीभगत की राजनीति में विश्वास नहीं करते। इसी दौरान उन्होंने कांग्रेस को लेकर “कांग्रेस की छाती पर तो मूंग में डलूंगा” वाला बयान भी दिया।

राजवी ने भाजपा में अनुशासन को लेकर भी कड़ा संदेश दिया। उनका कहना था कि पार्टी का विरोध करने वाला व्यक्ति भाजपा की मूल भावना के अनुरूप नहीं चल सकता। पार्टी में आने वाले लोगों का स्वागत किए जाने की बात कहते हुए उन्होंने बार-बार बगावत कर फिर वापसी की राजनीति को उचित नहीं बताया।

स्थानीय विधायक चंद्रभान सिंह आक्या से बातचीत के सवाल पर राजवी ने कहा कि अभी तक उनकी विधायक से बातचीत नहीं हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इससे पार्टी के फैसले पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि निर्णय व्यक्ति नहीं बल्कि संगठन करता है। उन्होंने कहा कि जो भाजपा के साथ रहेगा, वे उसके साथ खड़े रहेंगे।

विधानसभा चुनाव में मिली हार को लेकर राजवी ने इसे व्यक्तिगत हार के बजाय पार्टी की हार बताया। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के बावजूद यदि चुनाव नहीं जीता जा सका तो संगठन या व्यवस्था में कहीं न कहीं कमी रही होगी। राजनीति में चापलूसी को नुकसानदायक बताते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा मर्यादा में रहकर राजनीति की है।

कांग्रेस पर हमला कम, अपनी पार्टी की अंदरूनी खींचतान ज्यादा चर्चा में

नगर निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है और चित्तौड़गढ़ में सियासी तापमान भी बढ़ता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस पर हमले के बीच राजवी के सबसे ज्यादा चर्चित बयान अपनी ही पार्टी के नेताओं और स्थानीय संगठन से जुड़े राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा करते नजर आए। ‘दारू की दुकान से उठाकर राजनीति में लाया’, ‘निर्दलीय नहीं खड़ा करूंगा’, ‘टिकट पार्टी तय करेगी’ और ‘ना प्लॉट खरीदना है, ना प्लॉट बेचना है’ जैसे बयानों ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है।

राजवी ने किसी नेता का नाम लेकर सीधे आरोप नहीं लगाया, लेकिन उनके बयानों की राजनीतिक व्याख्या स्थानीय भाजपा की अंदरूनी खींचतान से जोड़कर की जा रही है। खास बात यह है कि जिस निर्दलीय राजनीति पर राजवी ने तीखा तंज कसा, उसी चित्तौड़गढ़ विधानसभा चुनाव में चंद्रभान सिंह आक्या निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उनके सामने उतरे थे और उन्हें हराया था। अब वही आक्या भाजपा में हैं और चित्तौड़गढ़ के विधायक हैं। ऐसे में राजवी का ताजा पलटवार केवल कांग्रेस पर हमला नहीं, बल्कि पुराने राजनीतिक टकराव और भाजपा के भीतर मौजूद गुटीय समीकरणों की ओर भी इशारा करता नजर आ रहा है। निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है, बयानों का दौर शुरू हो चुका है और चित्तौड़गढ़ का सियासी पारा भी चढ़ने लगा है।

Post a Comment

Previous Post Next Post