अफीम नीति 2026-27 के खिलाफ चार जिलों के किसान लामबंद, नीमच में नारकोटिक्स कार्यालय का घेराव; मांगें नहीं मानीं तो उग्र आंदोलन की चेतावनी!
मॉर्फिन की अनिवार्य मात्रा 3.7% करने, अफीम का सरकारी खरीद मूल्य एक लाख रुपए प्रति किलो तय करने और एनडीपीएस एक्ट के कड़े प्रावधानों में राहत देने की मांग
डीएस सेवन न्यूज नीमच। केंद्र सरकार की नई अफीम नीति 2026-27 के कड़े नियमों और अफीम की खेती में लगातार बढ़ती लागत को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। नई नीति के विरोध में नीमच, मंदसौर, प्रतापगढ़ और चित्तौड़गढ़ जिले के सैकड़ों अफीम उत्पादक किसान एकजुट हो गए। किसानों ने नीमच स्थित केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो कार्यालय का घेराव कर अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया।
मल्हारगढ़ से किसान प्रतिनिधि जोकचंद के नेतृत्व में किसानों ने उपायुक्त नारकोटिक्स के माध्यम से केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम ज्ञापन सौंपा। किसानों ने अफीम नीति में संशोधन की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो किसान उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
मॉर्फिन की मात्रा बढ़ने से किसानों के पट्टों पर संकट
ज्ञापन में किसानों ने बताया कि नई अफीम नीति में मॉर्फिन की अनिवार्य मात्रा 4.2 और 4.4 प्रतिशत निर्धारित की गई है। इसके चलते कई किसानों के पुराने चीरा लगाने वाले पट्टे निरस्त कर उन्हें 5 आरी के सीपीएस पट्टों में बदल दिया गया है। किसानों ने मॉर्फिन की अनिवार्य मात्रा घटाकर 3.7 प्रतिशत करने की मांग की है, ताकि प्रभावित किसानों को राहत मिल सके।
किसानों का कहना है कि 90 किलोग्राम से अधिक औसत डोडा उत्पादन देने वाले किसानों को भी केवल 5 आरी का पट्टा दिया गया है। उन्होंने प्रतिवर्ष 90 किलोग्राम की औसत देने वाले किसानों को 10 आरी का चीरा लगाने वाला पट्टा देने और सीपीएस का दायरा बढ़ाने की मांग रखी।
1997-98 से रुके अफीम पट्टे बहाल करने की मांग
किसानों ने वर्ष 1997-98 से लेकर अब तक के सभी पात्र किसानों के रुके हुए अफीम पट्टों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर उन्हें दोबारा बहाल करने की मांग की। इसके साथ ही नए पात्र किसानों को अफीम की खेती से जोड़ने के लिए नए लाइसेंस जारी करने की मांग भी उठाई गई।
अफीम का सरकारी खरीद मूल्य एक लाख रुपए प्रति किलो करने की मांग
किसानों ने ज्ञापन में खेती की बढ़ती लागत का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि कृषि उपकरण, खाद, दवाइयों और मजदूरी के खर्च में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में अफीम की खेती करना महंगा होता जा रहा है। किसानों ने अपनी मेहनत और लागत को देखते हुए अफीम का सरकारी खरीद मूल्य बढ़ाकर एक लाख रुपए प्रति किलोग्राम निर्धारित करने की मांग की।
डोडाचूरा को एनडीपीएस एक्ट के कड़े प्रावधानों से बाहर करने की मांग
ज्ञापन में किसानों ने डोडाचूरा से जुड़े कानूनी प्रावधानों में राहत देने की मांग भी की। किसानों का कहना है कि डोडाचूरा में मॉर्फिन की मात्रा 0.02 प्रतिशत से भी कम होती है। इसलिए इसे एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/15 और 8/29 के कड़े दायरे से बाहर किया जाना चाहिए।
किसानों ने मांग की कि इस संबंध में राहत देकर जेलों में बंद हजारों निर्दोष किसानों को अदालती मामलों से राहत दिलाई जाए।
प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों के पट्टे बहाल हों
किसानों ने ओलावृष्टि और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से खराब हुई अफीम की फसलों का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि कई किसानों ने विभाग की मौजूदगी में खराब फसलों को नष्ट कराया था, इसके बावजूद उनके चीरा लगाने वाले पट्टों को सीपीएस श्रेणी में डाल दिया गया।
किसानों ने ऐसे सभी मामलों पर पुनर्विचार कर प्रभावित किसानों के पुराने चीरा लगाने वाले पट्टे दोबारा बहाल करने की मांग की है।
मांगें नहीं मानीं तो उग्र आंदोलन की चेतावनी
चार जिलों से एकजुट हुए अफीम उत्पादक किसानों ने केंद्र सरकार से अफीम नीति 2026-27 में तत्काल संशोधन करने की मांग की है। किसान प्रतिनिधियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि मॉर्फिन की अनिवार्य मात्रा, अफीम पट्टों की बहाली, सरकारी खरीद मूल्य और एनडीपीएस एक्ट से जुड़ी मांगों का स्थायी समाधान नहीं हुआ तो क्षेत्र के किसान उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
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