पंचायत चुनाव में पोलिंग पार्टियों की 5 दिन की परीक्षा, एक ही टीम कराएगी EVM और बैलेट पेपर से मतदान
रिपोर्ट दशरथ सिंह सारंगदेवोत अर्पिता कुंवर चौहान
डीएस सेवन न्यूज जयपुर। राजस्थान में पंचायती राज चुनाव की तैयारियों के बीच इस बार मतदान कराने वाली पोलिंग पार्टियों के सामने लंबी और चुनौतीपूर्ण ड्यूटी का खाका सामने आया है। पंचायत चुनाव में एक ही पोलिंग पार्टी को जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए EVM से मतदान कराने के बाद सरपंच और वार्ड पंच के लिए बैलेट पेपर व मतपेटी से मतदान कराना होगा। इसके बाद उपसरपंच का चुनाव भी इसी टीम की जिम्मेदारी होगी।
इस पूरी प्रक्रिया के चलते मतदान कर्मियों को कई दिनों तक मतदान केंद्र पर रहना पड़ेगा। पहले चरण के उदाहरण के अनुसार पोलिंग पार्टियां 22 अक्टूबर को अंतिम प्रशिक्षण के बाद मतदान केंद्रों के लिए रवाना होंगी और 26 अक्टूबर को उपसरपंच का चुनाव कराने के बाद ड्यूटी से मुक्त होंगी। यानी कर्मचारियों को करीब चार रात और पांच दिन चुनावी ड्यूटी में रहना होगा।
एक ही पोलिंग पार्टी संभालेगी दो तरह की मतदान प्रक्रिया
चुनाव की खास बात यह है कि जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव के लिए EVM का इस्तेमाल होगा, जबकि सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव बैलेट पेपर के जरिए मतपेटी से कराए जाएंगे। यानी एक ही पोलिंग पार्टी को दोनों व्यवस्थाओं को संभालना होगा।
पहले चरण में 22 अक्टूबर को पोलिंग पार्टियां मतदान केंद्रों के लिए रवाना होंगी। 23 अक्टूबर को जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए EVM से मतदान कराया जाएगा।
इसके बाद 24 अक्टूबर को सरपंच और वार्ड पंच के नामांकन, जांच, नाम वापसी और चुनाव चिह्न आवंटन से जुड़ी प्रक्रिया होगी। यह प्रक्रिया संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर की मौजूदगी में पूरी की जाएगी।
इसके अगले दिन 25 अक्टूबर को सरपंच और वार्ड पंच के लिए बैलेट पेपर से मतदान कराया जाएगा। मतदान के बाद मतगणना और परिणाम की प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद 26 अक्टूबर को उपसरपंच का चुनाव कराया जाएगा और तभी पोलिंग पार्टी ड्यूटी से मुक्त हो सकेगी।
अगले तीन चरणों में भी इसी तरह चलेगी प्रक्रिया
यह लंबी ड्यूटी केवल पहले चरण तक सीमित नहीं रहेगी। अगले तीन चरणों में भी लगभग इसी पैटर्न पर मतदान कर्मियों को कई दिनों तक चुनावी ड्यूटी निभानी होगी। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव 29 अक्टूबर, 4 नवंबर और 14 नवंबर को होंगे, जबकि संबंधित चरणों में सरपंच एवं वार्ड पंच के चुनाव क्रमशः 31 अक्टूबर, 6 नवंबर और 16 नवंबर को होंगे।
इस तरह एक ही पोलिंग पार्टी को अलग-अलग दिन EVM और बैलेट पेपर से मतदान कराने के साथ-साथ चुनाव प्रक्रिया के अगले चरणों को भी पूरा करना होगा।
पोलिंग बैग में EVM के साथ मतपेटियां भी रहेंगी
इस बार मतदान दल के सामने सामग्री ले जाने की जिम्मेदारी भी पहले से ज्यादा होगी। पोलिंग पार्टी के साथ जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव के लिए दो बैलेट यूनिट और दो कंट्रोल यूनिट रहेंगी। वहीं सरपंच और वार्ड पंच के मतदान के लिए दो मतपेटियां भी साथ ले जानी होंगी।
इसके अलावा मतदान सामग्री, पोलिंग बैग, वोटिंग कंपार्टमेंट, चिन्हित मतदाता सूची और ट्रेजरी से मिलने वाली अन्य आवश्यक चुनाव सामग्री भी टीम को अपने साथ ले जानी होगी।
मतदान दल में पीठासीन अधिकारी के साथ पोलिंग ऑफिसर-1, पोलिंग ऑफिसर-2, पोलिंग ऑफिसर-3 और पोलिंग ऑफिसर-4 सहित अन्य कर्मचारी शामिल रहेंगे।
पांच दिन की ड्यूटी के लिए निजी सामान भी ले जाना होगा
कई दिनों तक मतदान केंद्रों पर रहने के कारण कर्मचारियों को अपने निजी उपयोग का सामान भी साथ लेकर जाना पड़ेगा। खासकर दूरदराज के मतदान केंद्रों पर कर्मचारियों के ठहरने, भोजन, पानी और सुरक्षा की व्यवस्था बड़ी चुनौती बन सकती है।
इसके साथ ही EVM और मतपेटियों को मतदान प्रक्रिया पूरी होने तक सुरक्षित रखना भी मतदान दल की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।
2020 की व्यवस्था से इस बार क्या बदला?
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2020 में पंच और सरपंच के नामांकन की प्रक्रिया मतदान से करीब सात दिन पहले पूरी हो जाती थी और उसके बाद मतदान दल अलग प्रक्रिया के तहत मतदान केंद्रों पर पहुंचते थे। इस बार व्यवस्था में बदलाव के कारण एक ही पोलिंग पार्टी को कई दिनों तक लगातार चुनावी प्रक्रिया में शामिल रहना होगा।
संवाददाता दशरथ सिंह के अनुसार, इस बार गांव की सरकार चुनने की प्रक्रिया में प्रत्याशियों के साथ-साथ चुनाव कराने वाले कर्मचारियों की भी लंबी परीक्षा होगी। पोलिंग पार्टी को अंतिम ट्रेनिंग से लेकर उपसरपंच चुनाव तक लगातार जिम्मेदारी संभालनी होगी।
रिपोर्ट: दशरथ सिंह सारंगदेवोत अर्पिता कुंवर चौहान
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