देशभर में साइबर ठगी का जाल बिछाने वाले ‘म्यूल अकाउंट गैंग’ का पर्दाफाश, चित्तौड़गढ़ साइबर थाना पुलिस ने दो आरोपियों को दबोचा
डीएस सेवन न्यूज चित्तौड़गढ़। राजस्थान पुलिस के विशेष अभियान “म्यूल हंटर” के तहत चित्तौड़गढ़ साइबर थाना पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने ऐसे गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जो देशभर में होने वाली साइबर ठगी की रकम अपने बैंक खातों में प्राप्त कर उसे आगे ट्रांसफर करने और नकद निकासी में इस्तेमाल करते थे। जांच में सामने आया कि आरोपियों के बैंक खाते के खिलाफ पूरे देश में 101 साइबर शिकायतें दर्ज हैं।
जिला पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी ने बताया कि साइबर अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम एवं तकनीकी सेवाएं राजस्थान जयपुर के निर्देश पर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी दौरान साइबर पुलिस पोर्टल पर संदिग्ध एसबीआई खाते की जांच की गई, जिसमें देश के कई राज्यों से साइबर ठगी की शिकायतें जुड़ी मिलीं।
जांच में पता चला कि यह खाता “सोलफेव ट्रांसपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड” के नाम पर संचालित हो रहा था। खाते के खाताधारक गोपाल जाट और नारायण वैष्णव निवासी नयाखेड़ा-दौलतपुरा, थाना चंदेरिया पाए गए। पुलिस के अनुसार अगस्त 2025 के दौरान तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, केरल, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड और राजस्थान समेत कई राज्यों में हुई साइबर ठगी की रकम इसी खाते में जमा हुई थी।
साइबर थाना पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी पहले से सुनियोजित तरीके से साइबर ठगी की रकम अपने खातों में मंगवाते थे। इसके बाद रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर कमीशन लेकर बाकी राशि गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचाई जाती थी। पुलिस ने बताया कि आरोपी गोपाल जाट और नारायण वैष्णव के खातों में ठगी की राशि इनके सहयोगी अंकुश जैन निवासी दुर्ग (छत्तीसगढ़) द्वारा जमा कराई जाती थी। फिलहाल उसकी तलाश जारी है।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक मधु कंवर के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम में हेड कांस्टेबल ललिता सहित धर्मपाल, महेंद्र, रामनिवास, कुलदीप, अजित, संजय, निर्मल, नीतू और हेमेन्द्र शामिल रहे। पुलिस अब पूरे नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य खातों की भी गहन जांच कर रही है।
तरीका-ए-वारदात
गिरोह साइबर ठगी करने वाले नेटवर्क से जुड़कर ठगी की रकम अपने बैंक खातों में प्राप्त करता था। बाद में कमीशन काटकर रकम अन्य साथियों तक पहुंचाई जाती थी। इसी प्रक्रिया के जरिए देशभर में साइबर अपराधों को अंजाम दिया जा रहा था।
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