चित्तौड़गढ़ महिला एवं बाल चिकित्सालय में नवजात की मौत, प्रशासन ने शुरू की जांच
ऑपरेशन में देरी का आरोप, परिजनों ने कहा— “समय पर इलाज मिलता तो बच सकती थी जान”
डीएस सेवन न्यूज चित्तौड़गढ़। शहर के महिला एवं बाल चिकित्सालय में नवजात की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। घटना के बाद प्रशासन हरकत में आया और उपखंड अधिकारी तथा तहसीलदार अस्पताल पहुंचकर परिजनों से बातचीत की। मामले से जुड़े दस्तावेज और अस्पताल रिकॉर्ड भी प्रशासन ने अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
परिजनों का आरोप है कि प्रसूता की हालत गंभीर होने के बावजूद ऑपरेशन में देरी की गई, जिसके चलते नवजात की मौत हो गई। वहीं प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
मृत नवजात के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और स्टाफ पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने पहले ऑपरेशन की जरूरत बताई थी और उन्होंने तुरंत सहमति भी दे दी थी।
परिजनों के अनुसार, उन्हें बताया गया कि सुबह 8 बजे डॉक्टर आने के बाद ऑपरेशन किया जाएगा, लेकिन इमरजेंसी होने के बावजूद प्रसूता को घंटों इंतजार कराया गया। आरोप है कि करीब तीन घंटे तक लाइन में खड़ा रखने के बाद सुबह करीब 11 बजे ऑपरेशन किया गया।
परिजनों ने यह भी दावा किया कि रात तक बच्चा पूरी तरह स्वस्थ था, लेकिन देरी के कारण उसकी मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर पैसे मांगने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। घटना के बाद परिवार ने प्रशासन से न्याय की मांग की है।
अधिकारियों ने क्या कहा
घटना की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारी अस्पताल पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि कलेक्टर के निर्देश पर जांच शुरू की गई है। अस्पताल के रिकॉर्ड, रजिस्टर और संबंधित दस्तावेजों को जांच में शामिल किया गया है।
अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह देखा जा रहा है कि मरीज को अटेंड करने में कहीं देरी तो नहीं हुई। अस्पताल में मरीज की एंट्री से लेकर ऑपरेशन तक की पूरी प्रक्रिया की जांच की जा रही है।
प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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