डीएस सेवन न्यूज चित्तौड़गढ़। विश्व प्रसिद्ध चित्तौड़गढ़ दुर्ग में संरक्षित क्षेत्र के भीतर बिना अनुमति कराए जा रहे निर्माण कार्य के मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की शिकायत पर कोतवाली थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई दुर्ग क्षेत्र में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा मानी जा रही है।
पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि चित्तौड़गढ़ दुर्ग यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के साथ-साथ भारत सरकार द्वारा संरक्षित स्मारक भी है। दुर्ग की प्राचीर के भीतर का पूरा क्षेत्र प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल व अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत संरक्षित घोषित है, जहां किसी भी प्रकार का निर्माण, पुनर्निर्माण अथवा मरम्मत कार्य केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना नहीं किया जा सकता।
एएसआई के संरक्षण सहायक प्रेमचंद शर्मा द्वारा दी गई रिपोर्ट में बताया गया कि दुर्ग स्थित रत्न सिंह महल के सामने युवराजादित्य सिंह द्वारा बिना सक्षम अनुमति के निर्माण कार्य कराया जा रहा था। विभागीय अधिकारियों ने पूर्व में निर्माण कार्य रोकने और नियमों की पालना करने के निर्देश दिए थे, लेकिन चेतावनी के बावजूद कार्य जारी रहने की जानकारी सामने आई।
मामले को गंभीरता से लेते हुए कोतवाली थाना पुलिस ने प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल व अवशेष अधिनियम, 1958 की धारा 19(1) एवं 30(ए) तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 329(3) के तहत मामला दर्ज कर अनुसंधान प्रारंभ कर दिया है।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि चित्तौड़गढ़ दुर्ग की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से आने वाले दिनों में दुर्ग क्षेत्र का व्यापक सर्वे कराया जाएगा और नियमों के विपरीत पाए जाने वाले निर्माण कार्यों तथा अतिक्रमणों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में जिला प्रशासन ने दुर्ग क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं के विकास और अवैध निर्माणों पर अंकुश लगाने के लिए विशेष अभियान चलाने के संकेत दिए थे। एफआईआर दर्ज होने के बाद अब यह साफ हो गया है कि संरक्षित क्षेत्र में नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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