दो महीने से लापता दो सगे भाइयों को मिला माता-पिता का सहारा, चित्तौड़गढ़ पुलिस की तलाश राजसमंद में हुई पूरी
गुजरात के जामनगर रेलवे स्टेशन पर लावारिस मिले थे दोनों नाबालिग, बच्चों से मिले सुराग के आधार पर चित्तौड़गढ़ की मानव तस्करी विरोधी यूनिट ने कई इलाकों में की पड़ताल, कांकरोली में मिले परिजन
डीएस सेवन न्यूज चित्तौड़गढ़, 10 अक्टूबर। करीब दो महीने से अपने माता-पिता से बिछड़े दो नाबालिग सगे भाइयों को आखिरकार परिवार का साथ मिल गया। गुजरात के जामनगर रेलवे स्टेशन पर लावारिस हालत में मिले दोनों बच्चों के परिजनों तक पहुंचने में चित्तौड़गढ़ पुलिस की मानव तस्करी विरोधी यूनिट ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जामनगर पुलिस और बाल गृह संस्था के सहयोग से चली तलाश आखिरकार राजसमंद जिले के कांकरोली में पूरी हुई, जहां बच्चों के माता-पिता का पता लगाकर दोनों भाइयों को उनसे मिलवाया गया।
### 9 अगस्त को जामनगर रेलवे स्टेशन पर मिले थे दोनों भाई
मानव तस्करी विरोधी यूनिट चित्तौड़गढ़ की प्रभारी पुलिस निरीक्षक सुनीता गुर्जर ने बताया कि 9 अगस्त 2026 को गुजरात के जामनगर स्थित हापा रेलवे स्टेशन पर दो नाबालिग बच्चे लावारिस अवस्था में घूमते मिले थे। स्थानीय पुलिस ने दोनों को सुरक्षित संरक्षण उपलब्ध कराते हुए जामनगर की बाल गृह संस्था में आश्रय दिलवाया।
इसके बाद संस्था ने बच्चों के परिवार की तलाश शुरू की। पूछताछ के दौरान दोनों ने बताया कि वे सगे भाई हैं और अपने माता-पिता के साथ चित्तौड़गढ़ रेलवे स्टेशन के आसपास झोपड़ी में रहते थे। परिवार खाली बोतलें और कबाड़ इकट्ठा कर अपना जीवनयापन करता था।
### बच्चों से मिले सुराग ने चित्तौड़गढ़ पुलिस को दिखाई राह
दोनों बच्चों के बताए स्थान के आधार पर जामनगर की बाल गृह संस्था ने चित्तौड़गढ़ जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह से संपर्क किया और उनके परिजनों की तलाश में सहयोग मांगा।
पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर मानव तस्करी विरोधी यूनिट की प्रभारी सुनीता गुर्जर के नेतृत्व में एएसआई नटवर पटवा और महिला कांस्टेबल सुशीला कुंवर की टीम ने जामनगर पुलिस एवं बाल गृह संस्था के साथ मिलकर तलाश शुरू की।
### रेलवे स्टेशन से डंपिंग यार्ड तक की पूछताछ
पुलिस टीम ने चित्तौड़गढ़ रेलवे स्टेशन, ओछड़ी, प्रतापनगर, प्राइवेट बस स्टैंड और डंपिंग यार्ड सहित शहर के कई इलाकों में बच्चों के माता-पिता की जानकारी जुटाई।
विशेष रूप से रेलवे स्टेशन के आसपास झोपड़ियां बनाकर रहने वाले परिवारों और कबाड़ इकट्ठा करने वाले लोगों से पूछताछ की गई। टीम ने बच्चों की तस्वीरें दिखाकर और उनके माता-पिता के नाम बताकर पहचान कराने का प्रयास किया।
लगातार पूछताछ के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि दोनों बच्चों के माता-पिता चित्तौड़गढ़ में नहीं, बल्कि राजसमंद जिले के कांकरोली में हैं।
### कांकरोली में मिले माता-पिता, खत्म हुआ दो महीने का इंतजार
जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम ने कांकरोली में बच्चों के माता-पिता की तलाश की। परिजनों का पता लगने पर दोनों भाइयों को उनसे मिलवाया गया।
करीब दो महीने बाद अपने माता-पिता को सामने देखकर दोनों बच्चे खुशी से झूम उठे। लंबे समय से परिवार से दूर रह रहे दोनों भाइयों का अपनों से मिलन इस पूरी कार्रवाई का सबसे भावुक पल रहा।
### जामनगर पुलिस और बाल गृह संस्था ने जताया आभार
दोनों नाबालिग भाइयों को उनके परिवार से मिलवाने में चित्तौड़गढ़ पुलिस की भूमिका की जामनगर पुलिस और बाल गृह संस्था ने सराहना की।
संस्था और जामनगर पुलिस ने जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह तथा मानव तस्करी विरोधी यूनिट चित्तौड़गढ़ की टीम का धन्यवाद करते हुए सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
दो राज्यों की पुलिस और बाल संरक्षण संस्था के बीच समन्वय से दो महीने से परिवार से बिछड़े दोनों नाबालिग भाइयों की तलाश का सुखद अंत हुआ।
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