थाने पहुंचा युवक ICU में भर्ती, पुलिस पर मारपीट का आरोप; हत्या केस में निर्दोष फंसाने का भी दावा

थाने पहुंचा युवक ICU में भर्ती, पुलिस पर मारपीट का आरोप; हत्या केस में निर्दोष फंसाने का भी दावा

डीएस सेवन न्यूज उज्जैन। चिमनगंज मंडी थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 608/2026 को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। बंजारा समाज के प्रतिनिधियों ने समाज नेता आर. सागर कछावा के नेतृत्व में पुलिस अधीक्षक को शिकायत आवेदन देकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायत में सोनू कछावा और अनिल बंजारा को हत्या की घटना से असंबंधित बताते हुए उन्हें प्रकरण में आरोपी बनाए जाने पर आपत्ति जताई गई है। वहीं सोनू कछावा के 28 सितंबर को थाने पहुंचने के बाद कथित मारपीट किए जाने और बाद में ICU में भर्ती होने का आरोप लगाया गया है।

घटना के वक्त अस्पताल में होने का दावा

शिकायत के मुताबिक राहुल दरबार और जितेंद्र की हत्या की घटना रात करीब 12 से 12.05 बजे के बीच लक्की ढाबा, कानीपुरा रोड क्षेत्र में हुई थी। समाज प्रतिनिधियों का दावा है कि घटना से पहले चोट लगने के कारण सोनू कछावा सिविल अस्पताल उज्जैन में मौजूद था।

शिकायतकर्ताओं ने बताया कि घटना स्थल सिविल अस्पताल से करीब 12 किलोमीटर दूर है। ऐसे में उनका कहना है कि सोनू की उस समय की वास्तविक लोकेशन जांच का अहम हिस्सा होनी चाहिए।

CCTV और मोबाइल लोकेशन जांचने की मांग

समाज प्रतिनिधियों ने पुलिस अधीक्षक से मामले में केवल बयानों के बजाय वैज्ञानिक साक्ष्यों को भी जांच में शामिल करने की मांग की है। आवेदन में सिविल अस्पताल की CCTV फुटेज, संबंधित मोबाइल नंबरों की टावर लोकेशन, लक्की ढाबे के कैमरों और सिविल अस्पताल से संजीवनी अस्पताल तक के रास्ते में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग जांचने की मांग की गई है।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार इन साक्ष्यों से यह स्पष्ट हो सकता है कि घटना के समय संबंधित व्यक्ति वास्तव में कहां मौजूद थे।

आत्मसमर्पण के बाद मारपीट का आरोप

आवेदन में 28 सितंबर की घटना को लेकर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार परिवार को थाने बुलाए जाने के बाद सोनू कछावा करीब साढ़े नौ बजे चिमनगंज मंडी थाने पहुंचे और आत्मसमर्पण किया।

आरोप है कि उन्हें दिनभर थाने में रखा गया और रात में उनके साथ कथित रूप से मारपीट की गई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इसके बाद सोनू की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी। उन्हें पहले उज्जैन के हार्ट अस्पताल और फिर पाटीदार अस्पताल ले जाया गया, जहां ICU में भर्ती किए जाने की बात आवेदन में कही गई है।

इलाज के दौरान पुलिसकर्मियों के नाम बताए जाने का दावा

शिकायत में दावा किया गया है कि उपचार के दौरान सोनू कछावा ने अपने साथ हुई कथित मारपीट के संबंध में कुछ पुलिसकर्मियों के नाम बताए। आवेदन में पियूष मिश्रा, वीरेन्द्र जाट, कालीचरण, अविनाश, आनंद मिश्रा, अभिषेक सहित एक अन्य व्यक्ति का उल्लेख किया गया है।

समाज प्रतिनिधियों ने इन आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने के साथ अस्पताल में भर्ती होने से लेकर उपचार तक के मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की है।

थाने की CCTV और मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग

समाजजनों ने मांग की है कि थाने की CCTV रिकॉर्डिंग, अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट, डॉक्टरों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि पुलिस अभिरक्षा में मारपीट के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर नाम हटाने की मांग

शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि CCTV फुटेज, मोबाइल टावर लोकेशन और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों से सोनू कछावा और अनिल बंजारा की घटना में मौजूदगी नहीं मिलती है, तो उनके नाम प्रकरण से हटाए जाएं।

बंजारा समाज के प्रतिनिधियों ने पूरे मामले की जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराने, कथित पुलिस मारपीट की स्वतंत्र जांच कराने और संबंधित CCTV व मेडिकल दस्तावेज सुरक्षित रखने की मांग की है। साथ ही जांच में आरोप सही पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग पुलिस अधीक्षक से की गई है।

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