राजस्थान में अपराध के आंकड़ों में बदलाव: कुल केस घटे, NDPS और आर्म्स एक्ट में बढ़ीं कार्रवाई
सितंबर तक के तुलनात्मक आंकड़े जारी; हत्या, लूट, दुष्कर्म और पॉक्सो के मामलों में कमी, घरेलू प्रताड़ना से जुड़े केस बढ़े
डीएस सेवन न्यूज जयपुर। राजस्थान पुलिस की ओर से जारी वर्ष 2026 की सितंबर तक की अपराध संबंधी तुलनात्मक रिपोर्ट में कुल दर्ज अपराधों में कमी सामने आई है। वहीं, एनडीपीएस एक्ट, आर्म्स एक्ट और आबकारी अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में बढ़ोतरी हुई है। महिला एवं बच्चों के विरुद्ध कुछ प्रमुख अपराधों में भी पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले कमी दर्ज की गई है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2025 तक भारतीय दंड संहिता (IPC)/भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कुल 1,47,534 मामले दर्ज हुए थे। सितंबर 2026 तक यह संख्या घटकर 1,45,781 रह गई। इस तरह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 1,753 मामले कम दर्ज हुए।
हत्या और संपत्ति संबंधी अपराधों में भी गिरावट
पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, हत्या के मामलों में 23 और हत्या के प्रयास के मामलों में 174 की कमी दर्ज की गई। संपत्ति संबंधी अपराधों में भी गिरावट सामने आई। डकैती के मामले 19.67 प्रतिशत, लूट के मामले 16.40 प्रतिशत और नकबजनी के मामले 4.63 प्रतिशत कम हुए।
पुलिस मुख्यालय के अनुसार, अपराधों पर नियंत्रण के लिए गश्त, निगरानी और लक्षित कार्रवाई पर जोर दिया जा रहा है।
NDPS और आर्म्स एक्ट में बढ़े मामले
स्थानीय एवं विशेष अधिनियमों के तहत वर्ष 2025 में सितंबर तक 65,753 मामले दर्ज हुए थे। वर्ष 2026 की समान अवधि में यह संख्या बढ़कर 70,035 हो गई। यानी कुल 4,282 मामलों की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
इनमें एनडीपीएस एक्ट के तहत 1,815 मामले यानी 35.13 प्रतिशत, आर्म्स एक्ट के तहत 538 मामले यानी 10.17 प्रतिशत और आबकारी अधिनियम के तहत 908 मामले यानी 4.92 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
पुलिस विभाग ने इन बढ़ोतरी को सक्रिय कार्रवाई और कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन से जोड़ा है। हालांकि, दर्ज मामलों में वृद्धि अपने आप में अपराध की वास्तविक दर बढ़ने या घटने का निर्णायक प्रमाण नहीं है।
पॉक्सो और दुष्कर्म के मामलों में कमी
महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध दर्ज कुछ प्रमुख अपराधों में भी कमी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, पॉक्सो एक्ट के मामले 478 यानी 19.20 प्रतिशत कम हुए। दुष्कर्म के मामलों में 356 यानी 7.96 प्रतिशत और छेड़छाड़ के मामलों में 603 यानी 7.38 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
पुलिस विभाग ने छेड़छाड़ जैसे अपराधों में कमी के पीछे कालिका यूनिट, एंटी रोमियो स्क्वॉड और महिला सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन को अहम बताया है।
SC/ST एक्ट के मामलों में 15.47 प्रतिशत गिरावट
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में भी पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 954 की कमी आई। रिपोर्ट में इस श्रेणी के मामलों में 15.47 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई है।
घरेलू प्रताड़ना के मामलों में बढ़ोतरी
जहां कई प्रमुख अपराधों के आंकड़ों में कमी दर्ज की गई, वहीं घरेलू प्रताड़ना, दहेज की मांग और अन्य पारिवारिक विवादों से संबंधित मामलों में बढ़ोतरी हुई। वर्ष 2025 में सितंबर तक ऐसे 9,979 मामले दर्ज हुए थे, जबकि वर्ष 2026 की समान अवधि में यह संख्या बढ़कर 10,562 हो गई।
पुलिस विभाग का कहना है कि महिलाओं में जागरूकता बढ़ने और पुलिस तक शिकायत पहुंचाने के प्रति विश्वास के चलते ऐसी रिपोर्टिंग बढ़ी है। महिलाओं को सहायता और काउंसलिंग उपलब्ध कराने के लिए वृत्त स्तर पर पुलिस थानों में महिला सुरक्षा एवं सलाह केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।
महिला सुरक्षा पर पुलिस का जोर
राजस्थान पुलिस के अनुसार, महिला अपराधों की रोकथाम, पीड़ितों को समय पर सहायता, प्रभावी अनुसंधान और कानून के अनुरूप कार्रवाई प्राथमिकताओं में शामिल हैं। जारी आंकड़े बताते हैं कि कुल दर्ज अपराधों और कई गंभीर अपराध श्रेणियों में कमी आई है, जबकि विशेष कानूनों के तहत दर्ज मामलों तथा घरेलू प्रताड़ना से जुड़े प्रकरणों में बढ़ोतरी हुई है।
अपराध के आंकड़ों की पूरी तस्वीर समझने के लिए दर्ज मामलों के साथ पुलिस कार्रवाई, शिकायतों की रिपोर्टिंग और मामलों के निस्तारण जैसे पहलुओं को भी देखना महत्वपूर्ण है।
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