उदयपुर में डॉक्टरों पर हमला, विरोध के बाद हरकत में आया प्रशासन एसपी को दिया ज्ञापन

उदयपुर में डॉक्टरों पर हमला, विरोध के बाद हरकत में आया प्रशासन
डीएस सेवन न्यूज उदयपुर, 3 जून। शहर के जेपी ऑर्थोपेडिक अस्पताल में मरीज के परिजनों द्वारा किए गए हंगामे और चिकित्सकों के साथ मारपीट की घटना के बाद चिकित्सा जगत में आक्रोश फैल गया। घटना के विरोध में डॉक्टर एकजुट होकर जिला कलेक्ट्री पहुंचे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

जानकारी के अनुसार अस्पताल में भर्ती एक मरीज के उपचार को लेकर विवाद शुरू हुआ, जिसके बाद कुछ लोगों ने अस्पताल में तोड़फोड़ करते हुए डॉक्टरों और स्टाफ के साथ मारपीट कर दी। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

घटना के दौरान समझाइश के लिए पहुंचे इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. आनंद गुप्ता भी हमलावरों के गुस्से का शिकार हो गए। आरोप है कि उनके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई तथा उनके कपड़े तक फाड़ दिए गए।

घटना के बाद बुधवार को बड़ी संख्या में चिकित्सक और विभिन्न चिकित्सा संगठनों के प्रतिनिधि जिला कलेक्ट्री पहुंचे तथा पुलिस अधीक्षक अमृता दुहन को ज्ञापन सौंपा। चिकित्सकों ने कहा कि अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है और ऐसी घटनाओं पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

मीडिया से बातचीत में डॉ. आनंद गुप्ता ने बताया कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पांच सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया है। उन्होंने कहा कि अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज में बड़ी संख्या में लोग हंगामा और मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं, ऐसे में सभी दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए।

डॉ. गुप्ता ने यह भी बताया कि घटना के बावजूद मरीज का उपचार लगातार जारी रखा गया और चिकित्सकों ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए मरीज की देखभाल में कोई कमी नहीं आने दी। वर्तमान में मरीज की स्थिति में सुधार बताया जा रहा है।

पुलिस प्रशासन द्वारा निष्पक्ष जांच और कार्रवाई का भरोसा दिए जाने के बाद चिकित्सकों ने फिलहाल अपना विरोध स्थगित कर कार्य पर लौटने का निर्णय लिया है। हालांकि चिकित्सा संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समय में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।

घटना ने एक बार फिर अस्पतालों में चिकित्सकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य संस्थानों में कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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