भीलवाड़ा कांग्रेस में 17 उम्मीदवारों के सिंबल जमा नहीं करने का मामला

भीलवाड़ा में कांग्रेस को बड़ा झटका: 17 वार्डों में सिंबल जमा नहीं हो पाए, प्रदेश नेतृत्व ने मांगी रिपोर्ट
डीएस सेवन न्यूज जयपुर/भीलवाड़ा। राजस्थान कांग्रेस से जुड़ा भीलवाड़ा का मामला अब प्रदेश नेतृत्व तक पहुंच गया है। भीलवाड़ा नगर निगम के 17 वार्डों में कांग्रेस प्रत्याशियों के सिंबल समय पर जमा नहीं हो पाने को प्रदेश नेतृत्व ने गंभीरता से लिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मामले में तत्काल रिपोर्ट तलब की है।

जानकारी के अनुसार भीलवाड़ा नगर निगम में कुल 70 वार्ड हैं, लेकिन कांग्रेस अब 53 वार्डों में ही चुनावी मैदान में रहेगी। 17 वार्डों में पार्टी प्रत्याशियों के सिंबल निर्धारित समय तक जमा नहीं हो सके। नामांकन जमा करने की अंतिम समय सीमा दोपहर 3 बजे थी, जबकि प्रत्याशियों के नामों पर अंतिम सहमति बनने में देरी होती रही।

बताया गया कि प्रदेश नेतृत्व की ओर से 30 अगस्त की रात ही संबंधित वार्डों के प्रत्याशियों के सिंबल भीलवाड़ा भेज दिए गए थे। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर प्रत्याशियों के नामों को लेकर सहमति नहीं बन सकी। प्रभारी और जिला अध्यक्ष नामांकन प्रक्रिया के अंतिम समय में रिटर्निंग अधिकारी के कार्यालय पहुंचे, लेकिन नामों को लेकर सहमति बनने में देरी हो गई और निर्धारित समय निकल गया।

इस पूरे घटनाक्रम के पीछे स्थानीय स्तर पर कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं के बीच सामने आई खींचतान को भी अहम वजह माना जा रहा है। इससे पहले वॉर रूम में नेताओं के बीच विवाद और तीखी बहस की बात सामने आई थी। हालांकि पूरे मामले में वास्तविक जिम्मेदारी किसकी रही और सिंबल समय पर जमा क्यों नहीं हो सके, इसका फैसला प्रदेश नेतृत्व की रिपोर्ट के बाद ही होगा।

पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने प्रदेश प्रभारी मुकेश वर्मा से मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में पूरे घटनाक्रम, प्रत्याशियों के नामों पर सहमति नहीं बनने की वजह और जिम्मेदारी से जुड़े तथ्यों की जानकारी मांगी गई है।

रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रदेश नेतृत्व मामले में आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकता है। मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की भूमिका सामने आ रही है। प्रदेश स्तर पर चुनाव में टिकट और सिंबल वितरण को लेकर सामने आए अन्य मामलों की भी रिपोर्ट मांगे जाने की बात कही जा रही है।

फिलहाल कांग्रेस का फोकस नाम वापसी की प्रक्रिया पर है। नाम वापसी की अंतिम तारीख के बाद भीलवाड़ा समेत अन्य स्थानों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश नेतृत्व आगे की रणनीति तय कर सकता है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि 70 वार्डों वाले भीलवाड़ा नगर निगम में कांग्रेस को 17 वार्डों में प्रत्याशी उतारने का मौका क्यों नहीं मिला और इसके लिए जवाबदेही किसकी तय होगी।

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