स्वरा भास्कर के जौहर वाले बयान पर बवाल, रानी पद्मावती और चित्तौड़ की वीरांगनाओं के सम्मान पर उठी बहस
डीएस सेवन न्यूज चित्तौड़गढ़ अभिनेत्री स्वरा भास्कर एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में हैं। मामला संजय लीला भंसाली की 2018 में रिलीज हुई फिल्म 'पद्मावत' के जौहर दृश्य से जुड़ा है। दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान स्वरा ने फिल्म के क्लाइमेक्स में महिलाओं के जौहर दिखाए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि फिल्म का यह दृश्य उन्हें परेशान करने वाला लगा और सवाल किया कि अगर कोई महिला यौन हिंसा की पीड़िता हो तो क्या उसके पास जीवन जीने का अधिकार नहीं होना चाहिए।
स्वरा के इसी बयान की एक क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसे कई लोगों ने इस अर्थ में लिया कि उन्होंने जौहर करने वाली महिलाओं के फैसले को 'कायरता' से जोड़ा है। इसके बाद सोशल मीडिया पर स्वरा की जमकर आलोचना हुई और लोगों ने कहा कि चित्तौड़ की वीरांगनाओं और रानी पद्मावती से जुड़ी ऐतिहासिक स्मृति को इस तरह देखना राजपूत समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है।
विवाद बढ़ने के बाद स्वरा भास्कर ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर सफाई दी। उन्होंने कहा कि वायरल क्लिप का गलत अनुवाद किया गया है और उन्होंने कभी रानी पद्मावती या जौहर करने वाली महिलाओं को कायर नहीं कहा। स्वरा ने कहा कि उनकी बात का सही संदर्भ सामने नहीं आया और यदि उनकी आलोचना करनी है तो उनके वास्तविक बयान के आधार पर की जाए।
चित्तौड़ की वीरांगनाओं का साहस आज भी इतिहास में अमर
स्वरा के बयान और सफाई के बीच एक बार फिर चित्तौड़ की वीरांगनाओं और जौहर की ऐतिहासिक स्मृति चर्चा में आ गई है। राजपूत समाज के लिए चित्तौड़ केवल एक दुर्ग नहीं, बल्कि आन, बान, शान, साहस और स्वाभिमान की पहचान है।
चित्तौड़ के इतिहास में वीर राजपूत योद्धाओं के साथ उन वीरांगनाओं की गाथाएं भी दर्ज हैं, जिनके साहस और त्याग को पीढ़ियों से याद किया जाता रहा है। जौहर को राजपूत समाज की ऐतिहासिक स्मृति में कठिन परिस्थितियों के बीच सम्मान, अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा से जुड़ी परंपरा के रूप में देखा जाता है।
रानी पद्मावती का नाम भी चित्तौड़ की इसी गौरवपूर्ण लोक-स्मृति से जुड़ा है। उनके नाम के साथ जुड़ी जौहर की गाथा राजपूत समाज के लिए केवल इतिहास का एक प्रसंग नहीं, बल्कि स्वाभिमान और साहस की अमर स्मृति है।
चित्तौड़ की वीरांगनाओं की गाथाएं आज भी इसलिए दोहराई जाती हैं क्योंकि उनका इतिहास राजपूत समाज के लिए अपनी विरासत, मर्यादा और स्वाभिमान से जुड़ा हुआ है। यही वजह है कि जौहर जैसे विषय पर किसी भी टिप्पणी को लेकर भावनाएं आज भी बेहद गहरी हैं।
समय बदला, पीढ़ियां बदलीं, लेकिन चित्तौड़ की धरती पर लिखी वीरता, त्याग और स्वाभिमान की गाथाएं आज भी इतिहास के पन्नों से निकलकर लोगों की स्मृतियों में जीवित हैं।
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