उदयपुर गोगुंदा एक तरफ पंचायत चुनाव में विकास के दावे, दूसरी तरफ महाराणा प्रताप की राजतिलक स्थली बदहाल! प्रतिमा हटने के बाद अब तक नहीं हुई स्थापना

 पंचायत चुनाव में विकास के दावे, लेकिन महाराणा प्रताप की राजतिलक स्थली बदहाल! प्रतिमा हटने के बाद अब तक नहीं हुई दोबारा स्थापना

गोगुंदा में ऐतिहासिक धरोहर की अनदेखी पर उठे सवाल, साफ-सफाई और व्यवस्थाओं की स्थिति भी चिंताजनक; आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार?
डीएस सेवन न्यूज गोगुंदा, उदयपुर। राजस्थान में पंचायतीराज चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। गांवों में नामांकन प्रक्रिया के साथ विकास के वादों और दावों का दौर जारी है। लेकिन इसी चुनावी हलचल के बीच मेवाड़ के स्वाभिमान और वीरता के प्रतीक महाराणा प्रताप की ऐतिहासिक राजतिलक स्थली अपनी बदहाली को लेकर सवालों के घेरे में है।

गोगुंदा स्थित इस ऐतिहासिक स्थल पर कभी महाराणा प्रताप की प्रतिमा स्थापित थी, जिसे जर्जर होने के कारण हटा दिया गया था। लेकिन लंबा समय गुजरने के बावजूद प्रतिमा की दोबारा स्थापना नहीं हो सकी है। प्रतिमा के अभाव में यह ऐतिहासिक स्थल आज सूना नजर आता है।

 जिस स्थल से जुड़ा मेवाड़ का गौरवशाली इतिहास, वहीं व्यवस्थाओं पर सवाल

महाराणा प्रताप की राजतिलक स्थली केवल एक ऐतिहासिक स्थान नहीं, बल्कि मेवाड़ की वीरता, स्वाभिमान और गौरवशाली विरासत का प्रतीक है। ऐसे महत्वपूर्ण स्थल पर प्रतिमा का लंबे समय तक स्थापित नहीं होना जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

इतना ही नहीं, परिसर में साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं की स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐतिहासिक महत्व रखने वाले इस स्थल के संरक्षण और रखरखाव पर गंभीर ध्यान देने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

 चुनाव में विकास की बातें, लेकिन ऐतिहासिक धरोहर की सुध कौन लेगा?

एक ओर पंचायत चुनाव में विकास के मुद्दे उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर महाराणा प्रताप की राजतिलक स्थली की वर्तमान स्थिति इन दावों के बीच बड़ा सवाल बनकर सामने आई है।

सवाल यह है कि जब ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की बात आती है, तो जिम्मेदारों की प्राथमिकता में ऐसे महत्वपूर्ण स्थल कहां खड़े हैं? प्रतिमा हटाए जाने के बाद अब तक उसकी दोबारा स्थापना क्यों नहीं हो पाई और इसके लिए क्या प्रयास किए गए?

अब सबसे बड़ा सवाल—महाराणा प्रताप की प्रतिमा कब लौटेगी?

गोगुंदा की यह ऐतिहासिक राजतिलक स्थली मेवाड़ की पहचान से जुड़ी हुई है। ऐसे में इसका उचित संरक्षण, नियमित साफ-सफाई और महाराणा प्रताप की प्रतिमा की पुनर्स्थापना महत्वपूर्ण विषय हैं।

अब देखना होगा कि चुनावी माहौल में विकास के दावे करने वाले जनप्रतिनिधि और संबंधित जिम्मेदार अधिकारी इस ऐतिहासिक धरोहर की सुध कब लेते हैं।

फिलहाल सवाल वही है—जिस धरती पर महाराणा प्रताप के स्वाभिमान का इतिहास जुड़ा है, वहां उनकी प्रतिमा की दोबारा स्थापना का इंतजार आखिर कब खत्म होगा?



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