हाईकोर्ट की उत्तराखंड पुलिस को फटकार: आप सरकार की छवि बचाने के लिए हैं या नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए?"
दिल्ली जाने से रोका तो हाईकोर्ट सख्त: 'आप कौन होते हैं रोकने वाले? यह तो सरासर गुंडागर्दी है'"
डीएस सेवन न्यूज देहरादून। दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के नेता प्रभात ध्यानी को ऋषिकेश रेलवे स्टेशन पर हिरासत में लेने के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा कि "आप सरकार की छवि बचाने के लिए हैं या नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने के लिए?"
मामला तब सामने आया जब 20 जुलाई को आयोजित "चलो संसद" अभियान में शामिल होने के लिए प्रभात ध्यानी दिल्ली जाने वाले थे। इससे पहले ही उत्तराखंड पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इसके बाद उनके सहयोगियों ने हाईकोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दायर कर हिरासत को अवैध बताया।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह की खंडपीठ ने राज्य सरकार और पुलिस से कई तीखे सवाल पूछे। अदालत ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के दिल्ली में कानून का उल्लंघन करने की आशंका थी, तो उससे निपटना दिल्ली पुलिस का काम है, उत्तराखंड पुलिस का नहीं।
राज्य सरकार की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा और सरकार की छवि का तर्क दिए जाने पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सरकार की छवि के नाम पर किसी नागरिक के संवैधानिक अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि "बड़े-बड़े शब्द मत बोलिए, इस मामले में इनका कोई मतलब नहीं है।"
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि देश के किसी भी नागरिक को भारत में कहीं भी आने-जाने का संवैधानिक अधिकार है और केवल आशंका के आधार पर किसी को उसके राज्य में ही रोकना उचित नहीं ठहराया जा सकता।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियों का दायित्व नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है, न कि सरकार की छवि बचाना।
फिलहाल मामले की सुनवाई जारी है और अदालत ने राज्य सरकार व पुलिस से जवाब तलब किया है।