रात 8 बजे BJP, 3 बजे कांग्रेस और दोपहर में फिर बीजेपी, आखिर किस 'खौफ' में जी रहे हैं निर्दलीय पार्षद ?

18 घंटे में 3 बार बदली निष्ठा, जयपुर में मेयर की कुर्सी पर सियासी थ्रिलर; निर्दलीय पार्षद रईस खान को लेकर BJP-कांग्रेस में खींचतान
डीएस सेवन न्यूज जयपुर। नगर निगम चुनाव के नतीजों के बाद राजधानी में महापौर की कुर्सी को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। किशनपोल विधानसभा क्षेत्र के वार्ड-109 से निर्दलीय चुनाव जीतने वाले पार्षद रईस खान को लेकर ऐसा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जिसने दोनों प्रमुख दलों की रणनीति को प्रभावित किया है। खास बात यह है कि महज करीब 18 घंटे के भीतर रईस खान की राजनीतिक निष्ठा को लेकर तीन अलग-अलग तस्वीरें सामने आईं।

मामले की शुरुआत गुरुवार शाम हुई, जब किशनपोल से पूर्व भाजपा प्रत्याशी चंद्र मनोहर बटवाड़ा निर्दलीय पार्षद रईस खान को लेकर भाजपा प्रदेश मुख्यालय पहुंचे। यहां भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने रईस खान को पार्टी की सदस्यता दिलाई और दुपट्टा पहनाकर उनका स्वागत किया।

इसके बाद चंद्र मनोहर बटवाड़ा ने सोशल मीडिया पर रईस खान के साथ तस्वीरें साझा करते हुए दावा किया कि 45 साल बाद वार्ड-109 में भाजपा विचारधारा का परचम फहराया गया है। इस घटनाक्रम के बाद रईस खान के भाजपा के साथ जाने की चर्चा तेज हो गई।

रईस खान ने वार्ड-109 से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीता है। चुनाव में उन्होंने कांग्रेस विधायक अमीन कागजी के करीबी माने जाने वाले पूर्व पार्षद मो. अय्यूब को हराया था। ऐसे में चुनाव परिणाम के बाद उनका रुख महापौर चुनाव के समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

लेकिन भाजपा मुख्यालय पहुंचने के कुछ ही समय बाद सियासी तस्वीर फिर बदलती नजर आई। रईस खान को लेकर सामने आए घटनाक्रम ने यह संकेत दिया कि महापौर चुनाव से पहले निर्दलीय पार्षदों को अपने पक्ष में करने के लिए दोनों दलों के बीच जोरदार राजनीतिक प्रयास चल रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि रईस खान आखिर किसके साथ जाएंगे? महापौर चुनाव में एक-एक पार्षद का समर्थन महत्वपूर्ण हो सकता है। ऐसे में वार्ड-109 के इस निर्दलीय पार्षद के रुख पर भाजपा और कांग्रेस दोनों की नजर बनी हुई है।

रईस खान की निष्ठा को लेकर कुछ ही घंटों में बदलती तस्वीर ने जयपुर की सियासत में नया सस्पेंस पैदा कर दिया है। अब आने वाले समय में उनका अंतिम राजनीतिक फैसला किसके पक्ष में जाता है, इसी पर महापौर चुनाव के समीकरणों को लेकर आगे की तस्वीर साफ होगी।

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