CEC ज्ञानेश कुमार पर उठे सवालों के बीच NDA के 3 सहयोगियों ने मांगी सफाई

चुनाव आयोग को लेकर उठे सवालों के बीच NDA के सहयोगी दल बोले- भ्रम दूर करे आयोग, जनता का भरोसा सबसे जरूरी
नई दिल्ली। चुनाव आयोग के कामकाज और वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सामने आई चर्चाओं के बीच NDA के तीन सहयोगी दलों ने भी आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। LJP-R प्रमुख चिराग पासवान, RLM अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा और TDP के लोकसभा फ्लोर लीडर लावु श्रीकृष्ण देवरायालु ने अलग-अलग बयानों में चुनावी प्रक्रिया को लेकर लोगों के बीच बने भ्रम को दूर करने पर जोर दिया।

मामला उस रिपोर्ट के सामने आने के बाद चर्चा में आया, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों के दौरान आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कई बार अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। रिपोर्ट में Form-6 में बदलाव, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा चुनावी डेटाबेस से जुड़े नियंत्रण जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया है।

चिराग बोले- चुनावी व्यवस्था पर भरोसा कमजोर नहीं होना चाहिए

LJP-R प्रमुख चिराग पासवान ने कहा कि चुनावी व्यवस्था को लेकर जनता के मन में किसी तरह का संदेह या भ्रम पैदा होना लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है। उन्होंने चुनाव आयोग से आग्रह किया कि सामने आए सवालों पर स्पष्टता के साथ जवाब दिया जाए, ताकि लोगों का संवैधानिक संस्थाओं और चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा बना रहे।

SIR को लेकर कुशवाहा ने मांगी तत्काल सफाई

RLM अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने भी SIR को लेकर सामने आ रही चर्चाओं और भ्रम की स्थिति पर आयोग से तत्काल स्थिति स्पष्ट करने की बात कही। उनका कहना है कि मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर लोगों के बीच किसी भी तरह की गलतफहमी नहीं रहनी चाहिए।

TDP ने पारदर्शिता को बताया जरूरी

TDP के लोकसभा फ्लोर लीडर लावु श्रीकृष्ण देवरायालु ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर स्पष्टता और पारदर्शिता से ही जनता का भरोसा मजबूत होता है।

चुनाव आयोग ने कहा- अंतिम फैसले सर्वसम्मति से

वहीं, चुनाव आयोग ने इन चर्चाओं के बीच अपना पक्ष रखते हुए कहा कि किसी संवैधानिक संस्था में अलग-अलग मुद्दों पर सदस्यों के बीच राय रखना विचार-विमर्श की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग के अनुसार SIR से जुड़े फैसलों सहित अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से दिए गए सुझावों का उद्देश्य चुनावी प्रक्रियाओं में सुधार करना था।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब निगाहें इस बात पर हैं कि चुनाव आयोग SIR और मतदाता सूची से जुड़े उठ रहे सवालों पर आगे किस तरह की विस्तृत स्थिति स्पष्ट करता है।

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