घूंघट वाली बहुएं अब संभालेंगी गांव की सत्ता, पंचायत चुनाव में महिलाओं का दबदबा

पंचायत चुनाव में महिलाओं का दबदबा, 221 पंचायत समितियों में महिला प्रधान बनेंगी; आरक्षण लॉटरी से बदला गांवों का सियासी गणित
डीएस सेवन न्यूज जयपुर। राजस्थान में आगामी पंचायतराज चुनावों से पहले आरक्षण की लॉटरी ने गांवों की राजनीति का पूरा गणित बदल दिया है। प्रदेशभर में पंचायत समिति प्रधान, जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्य पदों के लिए आरक्षण तय होने के बाद चुनावी हलचल तेज हो गई है। अब संभावित दावेदार अपने-अपने क्षेत्रों में नए समीकरण तलाशने में जुट गए हैं।

आरक्षण लॉटरी के तहत प्रदेश की 457 पंचायत समिति प्रधान, 1403 जिला परिषद सदस्य और 8245 पंचायत समिति सदस्य पदों की स्थिति तय की गई। इनमें महिलाओं को हर वर्ग में 50 फीसदी आरक्षण मिलने से महिला दावेदारों की भूमिका बेहद अहम हो गई है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 221 पंचायत समिति प्रधान पद महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगे।

जयपुर में 11 सीटों पर महिला प्रधान

राजधानी जयपुर की 22 पंचायत समितियों में आरक्षण के बाद 11 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हुई हैं, जबकि 4 सीटें अनारक्षित रखी गई हैं। इससे जिले में बड़ी संख्या में महिला दावेदारों के चुनाव मैदान में आने की संभावना है।

उदयपुर में OBC को प्रधान पद नहीं

उदयपुर की 20 पंचायत समितियों में केवल एक सीट अनारक्षित रही। वहीं आरक्षण लॉटरी में OBC वर्ग के लिए एक भी प्रधान पद नहीं आया। इससे जिले में संभावित उम्मीदवारों के बीच चुनावी समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

चार आदिवासी जिलों में ST का पूरा दबदबा

डूंगरपुर, बांसवाड़ा, सलूंबर और प्रतापगढ़ में पंचायत समिति प्रधान के सभी पद ST वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं। ऐसे में इन जिलों में प्रधान पद की राजनीति अब पूरी तरह ST आरक्षण के दायरे में होगी।

आरक्षण की तस्वीर साफ होते ही गांवों में चुनावी चौपालों का दौर शुरू हो गया है। दावेदार अपने समर्थकों से संपर्क साधने और स्थानीय समीकरण मजबूत करने में जुट गए हैं। अब आरक्षण के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि कौन-सा चेहरा किस सीट से मैदान में उतरता है।

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