डूंगरपुर में चुनावी व्यवस्था पर सवाल: शिक्षक को पड़ा दौरा, 20 मिनट तक नहीं मिली मेडिकल मदद; टूटा हाथ लेकर ड्यूटी पर पहुंचा दूसरा शिक्षक! निष्पक्ष मतदान कराने वाले कर्मचारियों की सेहत की चिंता किसे?

डूंगरपुर में चुनावी तैयारियों के बीच दो शिक्षकों की बेबसी आई सामने, एक को पड़ा दौरा तो दूसरा टूटा हाथ लेकर पहुंचा ड्यूटी पर
डीएस सेवन न्यूज डूंगरपुर। राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव के पहले चरण को लेकर प्रशासन की तैयारियां अंतिम दौर में हैं। मतदान दलों को प्रशिक्षण देकर रवाना किया जा रहा है, लेकिन डूंगरपुर में बुधवार को दो ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिन्होंने चुनाव ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

शहर के एसबीपी कॉलेज ग्राउंड में एक शिक्षक अचानक मिर्गी का दौरा पड़ने से घायल हो गया। वहीं, दूसरा शिक्षक हाथ में फ्रैक्चर और प्लास्टर होने के बावजूद चुनाव ड्यूटी करने पहुंचा। दोनों मामलों ने चुनावी तैयारियों के बीच कर्मचारियों की परेशानियों को सामने ला दिया।

मतदान सामग्री लेकर लौट रहे शिक्षक को अचानक पड़ा दौरा

जानकारी के अनुसार, डूंगरपुर जिले की सात पंचायत समितियों में पहले चरण के मतदान को लेकर बुधवार को एसबीपी कॉलेज ग्राउंड में मतदान दलों का अंतिम प्रशिक्षण आयोजित किया गया था। प्रशिक्षण के बाद कर्मचारियों को ईवीएम सहित आवश्यक चुनाव सामग्री उपलब्ध कराई जा रही थी।

इसी दौरान एमजीजीएस गेजी में कार्यरत एक शिक्षक अपने साथी मतदानकर्मियों के साथ सामग्री लेकर जा रहे थे। अचानक उन्हें मिर्गी का दौरा पड़ा और वे बेहोश होकर मुंह के बल जमीन पर गिर गए।

गिरने से शिक्षक के नाक और मुंह पर चोट आई और खून बहने लगा। घटना के बाद आसपास मौजूद मतदानकर्मी और पुलिसकर्मी तुरंत उनकी सहायता के लिए पहुंचे।

घायल शिक्षक को अस्पताल पहुंचाने में हुई देरी

घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल मौके पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध नहीं होने को लेकर उठा। घायल शिक्षक को तत्काल उपचार की जरूरत थी, लेकिन करीब 20 मिनट तक न तो स्वास्थ्यकर्मी पहुंचे और न ही एंबुलेंस उपलब्ध हो सकी।

आखिरकार घायल शिक्षक को तहसीलदार की गाड़ी से अस्पताल पहुंचाया गया। चुनाव जैसे बड़े आयोजन में अचानक स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति पैदा होने पर तत्काल चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने से व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए।

हाथ का ऑपरेशन हुआ, प्लास्टर चढ़ा, फिर भी चुनाव ड्यूटी

इसी प्रशिक्षण कार्यक्रम में एक और शिक्षक की स्थिति चर्चा का विषय बन गई। साबला ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय सुखवेरा में कार्यरत शिक्षक राजदीप सिंह चौहान हाथ पर प्लास्टर और गले में पट्टा बांधकर चुनाव ड्यूटी के लिए पहुंचे थे।

जानकारी के अनुसार, राजदीप सिंह का 15 सितंबर को सड़क हादसा हुआ था। हादसे में उनके हाथ में फ्रैक्चर हो गया था, जिसके बाद ऑपरेशन कर प्लेट लगानी पड़ी। उनका हाथ अभी भी प्लास्टर में था।

मेडिकल दस्तावेज दिखाए, फिर भी नहीं मिली राहत

राजदीप सिंह ने अपनी शारीरिक स्थिति को देखते हुए चुनाव ड्यूटी से राहत पाने का प्रयास भी किया था। वे 17 अक्टूबर को चिकित्सा संबंधी दस्तावेज लेकर एडीएम के पास पहुंचे और ड्यूटी निरस्त करने का अनुरोध किया।

लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। ऐसे में घायल अवस्था में ही उन्हें प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित होना पड़ा।

बताया गया कि प्रशिक्षण के दौरान जिला कलेक्टर सहित अन्य अधिकारी मंच पर मौजूद थे और राजदीप सिंह सामने ही कुर्सियों पर बैठे थे। इसके बावजूद उनकी परेशानी का समाधान नहीं हो सका।

चुनावी जिम्मेदारी के बीच कर्मचारियों की सुरक्षा पर उठे सवाल

डूंगरपुर में सामने आई इन दोनों घटनाओं ने चुनावी व्यवस्थाओं के एक महत्वपूर्ण पहलू की ओर ध्यान खींचा है। एक तरफ अचानक बीमार हुए शिक्षक को समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिल सकी, वहीं दूसरी ओर ऑपरेशन के बाद स्वास्थ्य लाभ ले रहे शिक्षक को भी चुनाव ड्यूटी से राहत नहीं मिली।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि मतदान दलों की रवानगी जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था कितनी प्रभावी है और गंभीर रूप से घायल कर्मचारियों की ड्यूटी संबंधी समस्याओं का समाधान किस आधार पर किया जा रहा है।

चुनाव को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन इस जिम्मेदारी को निभाने वाले कर्मचारियों की सेहत और सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

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