क्या एक करोड़ रुपये से पिता की कमी पूरी हो पाएगी? शराब तस्करी रोकने गए TI दिलीप पुरी की शहादत ने खड़े किए कई सवाल, बेटी ने दी पिता की अर्थी को कंधा

क्या एक करोड़ रुपये से पिता की कमी पूरी हो पाएगी? शराब तस्करी रोकने गए TI दिलीप पुरी की शहादत ने खड़े किए कई सवाल, बेटी ने दी पिता की अर्थी को कंधा
डीएस सेवन न्यूज मध्य प्रदेश देवास। एक बेटी के लिए उसके पिता सिर्फ परिवार का हिस्सा नहीं, बल्कि जिंदगी का सबसे बड़ा सहारा होते हैं। जिस पिता की उंगली पकड़कर उसने चलना सीखा, जिस पिता के साये में उसका बचपन बीता, उसी पिता की अर्थी को जब बेटी ने अपने कंधों पर उठाया तो वहां मौजूद हर आंख नम हो गई। यह दृश्य सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के सामने भी कई सवाल खड़े करता है, जहां कर्तव्य निभाते हुए एक पुलिस अधिकारी को अपनी जान गंवानी पड़ी।

मध्यप्रदेश के देवास जिले के खातेगांव थाना प्रभारी टीआई दिलीप पुरी 2 नवंबर को अवैध शराब तस्करी से जुड़े एक ट्रक को पकड़ने की कार्रवाई के दौरान ट्रक से कुचल दिए गए। इस घटना में उनकी मौत हो गई। जिस अधिकारी पर कानून की रक्षा और अपराधियों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी थी, वही अपनी ड्यूटी निभाते हुए जिंदगी की जंग हार गया।

जब उनका पार्थिव शरीर धार जिले के पैतृक गांव बरमंडल पहुंचा तो पूरा गांव शोक में डूब गया। अंतिम यात्रा में पुलिसकर्मियों और आमजन की भीड़ उमड़ी। लेकिन सबसे भावुक कर देने वाला पल तब आया, जब बेटी ने अपने पिता की अर्थी को कंधा दिया। उस दृश्य ने हर किसी को भीतर तक झकझोर दिया।

एक करोड़ की सहायता, लेकिन इन सवालों का जवाब कौन देगा?

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और दिवंगत टीआई की पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति के तहत एसआई पद देने की घोषणा की है। सरकार का यह कदम परिवार को आर्थिक संबल दे सकता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या एक करोड़ रुपये से एक बेटी को उसके पिता वापस मिल सकते हैं? क्या पत्नी को उसका जीवनसाथी और परिवार को उसका सहारा लौटाया जा सकता है?

पैसा भविष्य की आर्थिक जरूरतों में मदद कर सकता है, लेकिन उस खालीपन को कैसे भरेगा, जो अब इस परिवार की जिंदगी का हिस्सा बन गया है?

अब व्यवस्था से जवाब मांगते हैं ये सवाल

 अवैध शराब तस्करी रोकने गए पुलिस अधिकारी की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं?

 क्या ऐसे खतरनाक तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है?

 ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमले रोकने के लिए क्या ठोस व्यवस्था है?

 क्या शहीद अधिकारी के परिवार को आर्थिक सहायता देने के साथ इस घटना की जिम्मेदारी भी तय होगी?

 क्या अवैध शराब तस्करी के नेटवर्क पर ऐसी कार्रवाई होगी, जिससे भविष्य में किसी दूसरे परिवार को यह दिन न देखना पड़े?

टीआई दिलीप पुरी की मौत केवल एक पुलिस अधिकारी की मृत्यु नहीं, बल्कि उस परिवार की दुनिया उजड़ने की घटना है, जिसने अपने घर के सदस्य को खो दिया। एक करोड़ रुपये की सहायता की घोषणा अपनी जगह है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्था में बदलाव होगा?

क्योंकि किसी शहीद के परिवार को मुआवजा देना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि अगली बार किसी बेटी को अपने पिता की अर्थी को कंधा न देना पड़े।

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