“एक विसल, चार बदमाश और चित्तौड़गढ़ की रात… होमगार्ड की सतर्कता ने मिनटों में उलट दी एटीएम लूट की कहानी”
डीएस सेवन न्यूज़ चित्तौड़गढ़ की आम रातों की तरह वह मंगलवार का सन्नाटा भी शांत था। सड़कें खाली, हवा ठंडी और हर तरफ नींद का सुकून। लेकिन इसी सुकून के बीच एक जगह हलचल मचा रही थी—उदयपुर मुख्य मार्ग का वह एटीएम, जहां अज्ञात बदमाश कटर से मशीन को चीरते हुए भारी लूट की तैयारी कर चुके थे। उन्हें भरोसा था कि रात जितनी गहरी है, मौका उतना ही मुफीद है। पर उनकी योजना में एक चीज फिट नहीं बैठ पाई—एक होमगार्ड जवान की सूझबूझ।
रात करीब 2 बजे एक्सिस बैंक के एटीएम का सायरन बज उठा। गश्त पर तैनात होमगार्ड शंभू व्यास ने इसे पहले एंबुलेंस का सिग्नल समझा, क्योंकि जिला अस्पताल कुछ ही दूरी पर है। लेकिन जैसे-जैसे आवाज लगातार गूंजती रही, उसके मन में शक गहराता गया। उसने सोचा—“यह आवाज रुक क्यों नहीं रही? कहीं बैंक की तरफ कुछ गड़बड़ तो नहीं?”
संदेह बढ़ा, तो वह अपनी ड्यूटी वाली गली से सीधे मुख्य मार्ग की तरफ बढ़ गया। वहां पहुंचने पर दृश्य ऐसा था जिसने उसके कदम तेज़ कर दिए—एटीएम के बाहर खड़ी कार, पास में खड़ा एक व्यक्ति जिसके हाथ में कटर था, और मशीन से उठता धुआं। सब कुछ साफ था—बदमाश अंदर घुस चुके थे और एटीएम को काटा जा चुका था।
बिना देर किए शंभू ने विसल बजाई और एटीएम की तरफ दौड़ पड़ा। उसकी विसल की आवाज ने अंदर और बाहर खड़े चार बदमाशों की योजना को मिनटों में तहस-नहस कर दिया। सभी बदमाश घबराकर कार में बैठे और मौके से फरार हो गए। लूट की वारदात बस कुछ कदम दूर थी, पर एक जवान की सतर्कता ने इसे वहीं रोक दिया।
इस दौरान एटीएम में कटर की गर्मी से आग भी लग गई थी। पुलिस उप अधीक्षक बृजेश सिंह, प्रशिक्षु डिप्टी मनीष, सदर थाना प्रभारी और पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची। स्थिति संभालने के लिए दमकल को बुलाया गया और आग को काबू में लिया गया। बैंक प्रबंधन को सूचना दी गई और उनके बयान के बाद अज्ञात बदमाशों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई।
दिलचस्प बात यह रही कि वारदात के वक्त एटीएम के बाहर एक और व्यक्ति मौजूद था, जो पूरा घटनाक्रम कैमरे में रिकॉर्ड कर रहा था। यही वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ—जिसमें होमगार्ड की हिम्मत और बदमाशों की हड़बड़ाहट साफ दिख रही है।
शंभू व्यास ने बाद में बताया कि वारदात से लगभग आधा घंटा पहले प्रशिक्षु डिप्टी चेकिंग कर लौटे थे। उनके जाने के बाद ही सायरन की आवाज सुनाई दी। वह जब एटीएम पर पहुंचा, तो बदमाश उससे मात्र 10 फीट की दूरी पर थे। अगर वह कुछ सेकंड देर करता, शायद कहानी दूसरी होती।
उनकी बहादुरी देखकर पुलिस उप अधीक्षक मुख्यालय बृजेश सिंह ने मौके पर ही 500 रुपये का इनाम देकर होमगार्ड का हौसला बढ़ाया। राशि कम सही, लेकिन सम्मान बड़ा था—क्योंकि यह उसी सतर्कता के नाम था जिसने पूरे शहर का पैसा सुरक्षित रखा।
यह पूरी घटना यह साबित करती है कि सुरक्षा केवल मशीनों या तकनीक पर निर्भर नहीं होती। कभी-कभी जिम्मेदारी की एक विसल, समय पर उठाया गया एक कदम और किसी का कर्तव्यबोध ही वह दीवार बन जाता है जो अपराधियों की चाल को रोक देता है।
उस रात शहर सो रहा था—लेकिन एक जवान जाग रहा था। और उसी जागरूकता ने चित्तौड़गढ़ को एक बड़ी वारदात से बचा लिया।
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