चित्तौड़गढ़ कपासन में 2 करोड़ के फर्जी बीमा क्लेम का कथित रैकेट बेनकाब: डॉक्टर की गिरफ्तारी से उठे कई सवाल, जांच के दायरे में संगठित नेटवर्क

डीएस सेवन न्यूज चित्तौड़गढ़ जिले के कपासन में सामने आया बीमा दावे का एक मामला अब सिर्फ धोखाधड़ी की जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर रहा है कि किसी व्यक्ति की मौत का वास्तविक कारण आखिर दस्तावेजों में कैसे बदल गया।

मामला परसाखेड़ा निवासी बद्रीलाल जाट की मौत से जुड़ा है। जांच में सामने आया है कि मृतक लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रहा था, लेकिन बीमा क्लेम के लिए प्रस्तुत किए गए कुछ दस्तावेजों में मौत का कारण बिजली का करंट बताया गया। इसी विरोधाभास ने पूरे प्रकरण को संदेह के घेरे में ला दिया।

बीमा कंपनी द्वारा दस्तावेजों पर आपत्ति जताने के बाद शुरू हुई जांच में अब तक कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ चुके हैं। मृतक के पुत्र की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उप जिला चिकित्सालय कपासन के एक सरकारी डॉक्टर को भी गिरफ्तार किया है। आरोप है कि मौत से जुड़े दस्तावेजों की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हो सकती हैं।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल एक बीमा दावे तक सीमित नहीं हो सकता। करीब दो करोड़ रुपये के संभावित क्लेम ने पुलिस को इस दिशा में भी जांच करने के लिए प्रेरित किया है कि कहीं इसके पीछे कोई संगठित तंत्र तो सक्रिय नहीं था।

विशेषज्ञों का कहना है कि बीमा कंपनियां दुर्घटनाजन्य मृत्यु पर सामान्य मृत्यु की तुलना में अधिक लाभ देती हैं। ऐसे में यदि किसी मामले में मौत के कारण को लेकर विरोधाभास सामने आते हैं, तो उसकी गहन जांच आवश्यक हो जाती है।

फिलहाल पुलिस मेडिकल रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बीमा दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

यह प्रकरण एक बार फिर उन व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहा है जिन पर आमजन भरोसा करते हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल बीमा धोखाधड़ी का मामला नहीं होगा, बल्कि सार्वजनिक रिकॉर्ड की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर विषय भी बन सकता है।

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