बिनोता टाटरमाला खदानों का पानी बनेगा किसानों की ताकतसांसद जोशी एवं विधायक कृपलानी ने किया 7.18 करोड़ की सिंचाई परियोजनाओं का शिलान्यास

डीएस सेवन न्यूज निम्बाहेड़ा। पत्थर खदानों में वर्षों से जमा पानी अब किसानों के लिए वरदान साबित होने जा रहा है। निम्बाहेड़ा क्षेत्र में खदानों में संचित जल को कृषि कार्यों में उपयोग करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) से स्वीकृत 7 करोड़ 18 लाख रुपये से अधिक लागत की दो सामुदायिक सिंचाई परियोजनाओं का मंगलवार को शिलान्यास किया गया। परियोजनाओं के पूर्ण होने पर करीब 250 हेक्टेयर कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।

बड़ौली माधोसिंह और टाटरमाला में आयोजित कार्यक्रमों में पूर्व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष एवं सांसद सी.पी. जोशी मुख्य अतिथि रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व यूडीएच मंत्री एवं विधायक श्रीचंद कृपलानी ने की। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने परियोजनाओं की तकनीकी जानकारी प्रस्तुत करते हुए बताया कि खदानों में संरक्षित जल को पाइपलाइन एवं स्प्रिंकलर प्रणाली के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जाएगा।

सांसद सी.पी. जोशी ने कहा कि जल संरक्षण और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने इसे किसानों के लिए लाभकारी और भविष्य के लिए उपयोगी मॉडल बताते हुए कहा कि ऐसी योजनाएं जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों के लिए प्रेरणास्रोत बन सकती हैं।

विधायक श्रीचंद कृपलानी ने कहा कि निम्बाहेड़ा क्षेत्र में बड़ी संख्या में खदानें प्राकृतिक जल भंडारण केंद्र के रूप में मौजूद हैं, लेकिन अब तक इस पानी का सुनियोजित उपयोग नहीं हो पा रहा था। किसानों की सिंचाई जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डीएमएफटी के माध्यम से इन परियोजनाओं को स्वीकृति दिलाई गई है। उन्होंने विश्वास जताया कि योजना के लागू होने के बाद कृषि उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में सकारात्मक वृद्धि होगी।

परियोजना के तहत टाटरमाला, लक्ष्मीपुरा, सालरमाला, बिनोता, खोड़ीप, मिंडाना एवं मंडलाचारण क्षेत्र की खदानों में संचित जल का उपयोग करते हुए लगभग 492.72 लाख रुपये की लागत से 180 हेक्टेयर क्षेत्र में सामुदायिक स्प्रिंकलर सिंचाई व्यवस्था विकसित की जाएगी। वहीं बड़ौली माधोसिंह और चंगेड़ी क्षेत्र की खदानों के जल से 225.43 लाख रुपये की लागत से 70 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा से जोड़ा जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं से न केवल किसानों को वर्षभर सिंचाई जल उपलब्ध होगा, बल्कि भूजल स्तर सुधारने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी मदद मिलेगी। साथ ही निर्माण एवं तकनीकी कार्यों के दौरान स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

शिलान्यास समारोह में जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों, किसानों, खदान संचालकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने परियोजना को क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक पहल बताते हुए उम्मीद जताई कि खदानों के पानी का यह मॉडल भविष्य में निम्बाहेड़ा को सिंचाई के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगा।
समारोह के अंत में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश देते हुए उपस्थित लोगों को जल बचाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संकल्प भी दिलाया गया

Post a Comment

Previous Post Next Post