चित्तौड़गढ़ बिनोता नागपंचमी पर बिनोता के श्री खाकल देव मंदिर में उमड़ी आस्था उदयपुर के वल्लभनगर से पहुंची कैंसर पीड़ित महिला के परिवार ने बताई राहत की कहानी

बिनोता के श्री खाकल देव बावजी मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, 9-10 हजार श्रद्धालुओं ने किए नागराज के दर्शन
डीएस सेवन न्यूज बिनोता/निंबाहेड़ा। नागपंचमी के शुभ अवसर पर चित्तौड़गढ़ जिले की निंबाहेड़ा तहसील के बिनोता गांव स्थित प्रसिद्ध श्री खाकल देव बावजी मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। करीब 9 से 10 हजार श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर नागराज के दर्शन किए और प्रसाद ग्रहण किया। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु भी मंदिर पहुंचीं और क्षेत्र की खुशहाली एवं अच्छी बारिश की कामना की।

हवन, पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण

नागपंचमी के अवसर पर मंडल समिति के अध्यक्ष ठा. सा. श्री गजराज सिंह शक्तावत एवं समिति सदस्यों की मौजूदगी में हवन का आयोजन किया गया। हवन में आहुतियां देने के बाद नागराज की प्रतिमा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती की गई। इसके बाद प्रसाद का भोग लगाकर श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।

खाकल देव सेवा समिति के सदस्यों ने दर्शन व्यवस्था में सहयोग किया, जबकि समिति सदस्यों और बिनोता के ग्रामीणों ने प्रसाद वितरण में भी सहयोग किया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा।

कैंसर पीड़ित महिला को लेकर सामने आई आस्था की कहानी
मंदिर में पहुंचे श्रद्धालुओं के बीच उदयपुर जिले के वल्लभनगर क्षेत्र से आए एक परिवार से भी बातचीत हुई। महिला के पति ने बताया कि करीब ढाई से तीन महीने पहले उनकी पत्नी के कैंसर से पीड़ित होने की जानकारी सामने आई थी। डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी, लेकिन बाद में सफलता की संभावना कम बताते हुए उन्हें घर ले जाने की बात कही।

इसके बाद किसी परिचित के माध्यम से उन्हें बिनोता के श्री खाकल देव मंदिर के बारे में जानकारी मिली। परिवार करीब सवा महीने से मंदिर में रह रहा है। महिला के पति का कहना है कि इस दौरान उनकी पत्नी की स्थिति में उन्हें सुधार महसूस हुआ है और उनके अनुसार करीब 50 प्रतिशत तक फर्क महसूस हुआ है।

हालांकि, यह परिवार का व्यक्तिगत अनुभव और आस्था से जुड़ा दावा है

जहरीले जीव के काटने से जुड़ी पुरानी मान्यता

श्री खाकल देव मंदिर को स्थानीय स्तर पर ‘आस्था का अस्पताल’ भी कहा जाता है। मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, सांप या किसी अन्य जहरीले जीव के काटने पर पीड़ित को यहां लाया जाता है।
स्थानीय लोगों और मंदिर के पुजारी के अनुसार, मंदिर में स्थापित नागराज की प्रतिमा में लगे विशेष पाइप को कथित तौर पर प्रभावित स्थान पर लगाया जाता है और मान्यता है कि नागराज पीड़ित के शरीर से विष का प्रभाव दूर करते हैं। पुजारी के अनुसार, जहरीले जीव के काटने के बाद मंदिर पहुंचने वाले कुछ श्रद्धालुओं को एक से दो घंटे के भीतर राहत महसूस होने की मान्यता है।

यह धार्मिक आस्था और स्थानीय परंपरा का हिस्सा है। 

नागपंचमी के अवसर पर बिनोता में उमड़ी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ ने एक बार फिर इस क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं और मंदिर से जुड़ी गहरी आस्था को सामने रखा।

भोजन-प्रसाद की निशुल्क सेवा भी जारी
मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोजन और प्रसाद तैयार करने में धनराज।गायरी निवासी बिनोता और उनकी टीम की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। जानकारी के अनुसार, धनराशि गायरी और उनकी टीम पिछले कई वर्षों से मंदिर में निशुल्क सेवा दे रही है। टीम की ओर से श्रद्धालुओं के लिए भोजन एवं प्रसाद तैयार करने का कार्य लगातार किया जाता है। नागपंचमी जैसे विशेष अवसरों पर भी टीम सेवा भाव से जुटी रहती है

बिनोता से संवाददाता दशरथ सिंह की रिपोर्ट।

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