टिकटों से पहले बीजेपी में 'महाभारत'! जयपुर बैठक में चले चप्पल, हाथापाई में विधायक के चोट लगने जादौन ने फंदा लगाने की कोशिश

भाजपा की टिकट बैठक में बवाल! पूर्व विधायक राजकुमारी जाटव पर जिला अध्यक्ष से हाथापाई का आरोप, गुस्से में जादौन ने फंदा लगाने की कोशिश

जयपुर। निकाय चुनाव के टिकटों की घोषणा से पहले ही भाजपा में अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आने की चर्चा है। भरतपुर संभाग के निकाय चुनावों को लेकर संभाग प्रभारी एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी के आवास पर हुई बैठक में हिण्डौन के टिकटों को लेकर जमकर विवाद होने की बात सामने आई है। बैठक में भरतपुर संभाग से जुड़े भाजपा के प्रमुख पदाधिकारी मौजूद थे।

सूत्रों के मुताबिक, हिण्डौन नगर निकाय के टिकटों को लेकर नेताओं के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि तू-तू, मैं-मैं से मामला हाथापाई तक पहुंचने की स्थिति बन गई। चर्चा है कि हिण्डौन की पूर्व विधानसभा प्रत्याशी एवं पूर्व विधायक राजकुमारी जाटव और करौली जिला अध्यक्ष गोवर्धन सिंह जादौन के बीच तीखी नोकझोंक हुई।

घटनाक्रम को लेकर यह भी चर्चा है कि राजकुमारी जाटव के हाथ उठाने के आरोप से आहत गोवर्धन सिंह जादौन ने अपने ऊपर लगे कथित आरोपों को लेकर नाराजगी जताई। इसी दौरान उन्होंने गले में पहने भाजपा के पट्टे/दुपट्टे से फंदा लगाने का प्रयास किया। मामला बिगड़ता देख बैठक में मौजूद नेताओं ने तत्काल हस्तक्षेप कर उनके गले से दुपट्टा हटाया और उन्हें समझाया।

बैठक के दौरान एक विधायक और सांसद प्रत्याशी द्वारा दौड़कर जिला अध्यक्ष को बचाने की कोशिश किए जाने की भी चर्चा है। वहीं हंगामे के बीच करौली जिले के एक विधायक के हाथ में चोट लगने की बात भी सामने आ रही है। हालांकि, इन घटनाक्रमों की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

विवाद के बीच पैसों के कथित लेनदेन को लेकर भी आरोप-प्रत्यारोप होने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि अपने ऊपर लगे आरोपों से आहत जिला अध्यक्ष ने यहां तक इस्तीफा देने की पेशकश कर दी।

मामला बढ़ता देख संभाग प्रभारी अशोक परनामी को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा। समझाइश के बाद किसी तरह स्थिति को शांत कराया गया। सूत्रों के अनुसार, हिण्डौन की पूर्व विधानसभा प्रत्याशी को बैठक में फटकार लगाए जाने और इसके बाद उनके बैठक से निकल जाने की भी चर्चा है।

इस पूरे घटनाक्रम ने भाजपा के संगठनात्मक अनुशासन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। खास तौर पर तब, जब पार्टी खुद को अनुशासन और संगठनात्मक व्यवस्था के लिए अलग पहचान रखने वाली पार्टी बताती रही है।

हिण्डौन विधानसभा चुनाव में करीब 60 हजार वोटों से हार चुकी पूर्व प्रत्याशी को लेकर भी बैठक में कथित विवाद ने सियासी चर्चाओं को और हवा दे दी है। अब भाजपा के भीतर सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर हिण्डौन नगर निकाय के टिकट किसके इशारे, सलाह और मशवरे से तय होंगे?

निकाय चुनाव की टिकटों को लेकर सामने आए इस कथित घमासान के बाद अब निगाहें भाजपा नेतृत्व पर टिकी हैं। सवाल यह भी है कि पार्टी इस पूरे घटनाक्रम को अनुशासनहीनता मानते हुए कोई कार्रवाई करेगी या फिर टिकटों के ऐलान के साथ विवाद को शांत करने की कोशिश होगी।

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