सिर्फ सरकारी मास्टर नहीं अब प्राइवेट स्कूल के टीचर्स, बैंक कर्मी और प्राइवेट स्टाफ को करनी पड़ेगी जनगणना में ड्यूटी !

डिजिटल जनगणना को लेकर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, अब प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों के साथ बैंक और निजी कंपनियों के कर्मचारियों की भी लगेगी ड्यूटी
डीएस सेवन न्यूज जयपुर। देश में प्रस्तावित डिजिटल जनगणना की तैयारियों के बीच केंद्र सरकार ने जनगणना से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब जनगणना का काम केवल सरकारी कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। जनगणना नियम, 1990 में किए गए संशोधन के बाद निजी स्कूलों के शिक्षकों सहित बैंक, सार्वजनिक उपक्रमों और निजी कंपनियों के कर्मचारियों की सेवाएं भी ली जा सकेंगी।

हाई कोर्ट के फैसलों के बाद नियमों में बदलाव

दरअसल, इलाहाबाद, बॉम्बे और पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पुराने जनगणना नियमों का हवाला देते हुए गैर-सहायता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों को जनगणना जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने पर रोक लगाई थी। इसके चलते जनगणना कार्य के लिए कर्मचारियों की उपलब्धता को लेकर चुनौतियां सामने आई थीं।

अब केंद्र सरकार ने नियमों में संशोधन कर निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को भी इस कार्य में शामिल करने का रास्ता खोल दिया है।

निजी स्कूलों से लेकर बड़ी कंपनियों तक बढ़ा दायरा

संशोधित नियमों के अनुसार, सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों के साथ ट्रस्ट तथा सोसाइटी द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों की भी जनगणना में ड्यूटी लगाई जा सकेगी।

इसके अलावा राष्ट्रीयकृत एवं निजी बैंकों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) और निजी कंपनियों के कर्मचारियों को भी जनगणना कार्य में लगाया जा सकेगा।

घर-घर जाकर जुटाएंगे जानकारी

डिजिटल जनगणना के दौरान घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करने के लिए प्रगणकों (इन्यूमरेटर) और पर्यवेक्षकों (सुपरवाइजर) की आवश्यकता होगी। नए संशोधन से इन कार्यों के लिए उपलब्ध कर्मचारियों की संख्या बढ़ सकेगी।

सरकार के इस फैसले के बाद जनगणना कार्य में निजी क्षेत्र की भागीदारी का रास्ता भी खुल गया है। हालांकि, किन कर्मचारियों की ड्यूटी कहां और किस प्रकार लगाई जाएगी, यह संबंधित प्रशासनिक व्यवस्थाओं के तहत तय किया जाएगा।

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