चित्तौड़गढ़ - धनतेरस पर दो श्रद्धालुओं ने भगवान सांवलिया सेठ को भेंट किया चांदी का रथ एवं पालकी

 चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित प्रामाणिक कृष्ण धाम श्री 

सांवरियाजी मंदिर में दो आश्रमों ने भगवान सांवलिया सेठ के लिए चांदी से बनी पालकी और रजत रथ का निर्माण किया है। आगामी दिनों में लॉटरी में भगवान को इसी चांदी और पालकी में बिराजमान खींची वाली यात्रा निकलेगी। लकड़ी पर यह रजत रथ एवं पालकी तैयार की गई है, जो काफी आकर्षक दे रही है।

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जानकारी में सामने आया कि जिले के पवित्र कृष्णधाम श्री सांवरियाजी मंदिर में अपने मन की भावनाएं पूरी तरह से तरह- तरह की होती हैं। अब तक कई प्राचीन वैज्ञानिक वैज्ञानिक कर चुके हैं खुलासा। सोने और चाँदी के आभूषणों के अलावा सोने और चाँदी के आभूषणों में शामिल है। 



जहां अब दो साधुओं ने भगवान सांवलिया सेठ को चांदी का मंदिर बनाया है। एक मृत व्यक्ति की ओर से सिल्वर रथ को दूसरे अवशेष की ओर से एक रजत रथ की ओर से एक पालतू जानवर की हत्या कर दी गई। यहां धनतेरस के अवसर पर मंगलवार को रजत रथ व पालकी को मंदिर कार्यालय लाया गया। यहां मंदिर के प्रबंध निदेशक नंद किशोर टेलर, मंदिर बोर्ड के सदस्य संजय मंडोवरा, पूर्व बोर्ड सदस्य भैरूलाल सोनी की नियुक्ति में रजत एवं अभिभावक की नियुक्ति हुई। बताया गया है कि देव उठनी एकादशी को भगवान सांवलिया सेठ का बेवन नक्षत्र माना जाता है। 



इसमें भगवान के बाल विग्रह को बेवन में स्थापित कर नगर भ्रमण किया जाता है। अब तक लकड़ी के रथ में ही नगर भ्रमण किया जा रहा था। अब आने वाले दिनों में भगवान के बाल विग्रह को रजत रथ एवं पालकी में बिमान करवा कर नगर भ्रमण कराया जाएगा। 



यह बताया गया है कि ये दोनों ही सूक्ष्म गुजराती हैं और उनके ओर से यह गुप्त दान भगवान सांवलिया सेठ को दिया गया है। धनतेरस के दिन राजभोग आरती से पहले रथ और पालकी का मंदिर लाया गया, जिसमें सभी ने पुजारी के दर्शन किये।

23 किलो चांदी से तैयार हुई पालकी और रथ श्री सांवलियाजी मंदिर में दो भक्तों और पालकी और चांदी के रथों में करीब 23 किलो चांदी का उपयोग होता है। पाली के सुमेरपुर में तैयार हो गया। 23 किलो चांदी के अलावा लकड़ी का वजन लगभग 460 किलो वजनी रथ एवं पालकी है



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