चित्तौड़गढ़ मंगलवाड़ पांच हजार रुपये का ईनामी आरोपी गिरफ्तार, 1 देशी पिस्टल बरामद।

पांच हजार का ईनामी बदमाश पकड़ा गया: चोरी की कार, हथियार और गैंग की परतें खोलती बड़ी कार्रवाई
डीएस सेवन न्यूज़ चित्तौड़गढ़, 12 दिसम्बर मंगलवाड़ थाना पुलिस ने एक ऐसी कार्रवाई को अंजाम दिया है, जिसने महीनों से जिले की कानून-व्यवस्था को चुनौती दे रहे एक ईनामी अपराधी की गिरफ्तारी के साथ पूरी घटनाक्रम की परतें खोल दी हैं। पांच हजार रुपये के ईनामी बदमाश सुरेश कुमार जाट की गिरफ्तारी केवल एक अपराधी पर शिकंजा नहीं है, बल्कि उस संगठित गैंग की गतिविधियों को भी उजागर करती है जो चोरी की गाड़ियों से लेकर हथियारों के दम पर भय पैदा करने तक सक्रिय था।

मामला 22 मार्च 2025 से जुड़ा है, जब जयपुर निवासी कार मालिक इंद्राज पुत्र मुकेश धोबी की क्रेटा कार को चेतनराम नामक व्यक्ति किराये पर ले गया था, लेकिन न तो कार लौटाई और न ही किराया चुकाया। जब गाड़ी गायब हुई तो सबसे पहले कार के जीपीएस ने पुलिस को इस पूरे घटनाक्रम का सुराग दिया। लोकेशन दिखाई दी—थाना मंगलवाड़ क्षेत्र के हरियाखेड़ी गांव का एक बाड़ा। कुछ ही मिनटों में एएसआई प्रेमनाथ की टीम मौके पर पहुंच गई।

लेकिन वहां जो दिखा, वह सामान्य कार-चोरी का मामला नहीं था। बाड़े में एक काली बिना नंबर की स्कॉर्पियो, इंद्राज की क्रेटा और चार बड़े प्लास्टिक कट्टे पड़े थे। पुलिस टीम इससे आगे बढ़ती, इससे पहले ही स्थानीय निवासी देवीलाल मेनारिया, कन्हैयालाल मेनारिया सहित करीब 08–10 लोग हथियारों के साथ वहां आ धमके। गैंग ने पुलिस के सामने खुलेआम पिस्टल लहराई और दोनों गाड़ियों को लेकर फरार हो गया।

पुलिस टीम ने पीछा किया, लेकिन बदमाश क्रेटा कार को राणेरा महोदव के पास छोड़कर भागने में सफल रहे। मामला अब साधारण चोरी से निकलकर एक हथियारबंद गैंग की सक्रियता तक पहुंच चुका था। इस आधार पर थाना मंगलवाड़ में मुकदमा दर्ज कर गहन अनुसंधान शुरू हुआ।

जिला पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी, एएसपी सरिता सिंह, डीएसपी बड़ीसादड़ी देशराज कुलदीप और थानाधिकारी भगवान लाल के निर्देशन में इस ऑपरेशन को प्राथमिकता दी गई। इसी क्रम में 29 अक्टूबर 2025 को इस गैंग का पहला मुख्य सदस्य देवीलाल मेनारिया गिरफ्तार किया गया था, जिससे गैंग की गतिविधियों, हथियारों और फरार साथियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली।

लगातार निगरानी, मुखबिरों के इनपुट और तकनीकी विश्लेषण के बाद आखिरकार पुलिस के हाथ लगे इस पूरी कहानी का सबसे अहम किरदार—सुरेश कुमार जाट, जो बाड़मेर के रोहिली गांव का रहने वाला है और लंबे समय से फरार चल रहा था। वह न केवल इस प्रकरण में वांछित था, बल्कि थाना ग्रामीण बाड़मेर का हिस्ट्रीशीटर भी है। उसके नाम आर्म्स एक्ट, एनडीपीएस एक्ट और मारपीट जैसे 16 गंभीर मामले पहले से ही दर्ज हैं।

एएसआई फुलचंद और उनकी टीम—कांस्टेबल नारायण सिंह, टंवर सिंह, प्रेमाराम और उम्मेद सिंह—ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए सुरेश को धर दबोचा। तलाशी में उसके पास से एक देशी पिस्टल बरामद हुई, जो इस पूरे घटनाक्रम में उपयोग की गई थी। अदालत में पेशी के बाद उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।

इस गिरफ्तारी का महत्त्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि यह केवल एक वांछित अपराधी को पकड़ने की कार्रवाई नहीं है, बल्कि ऐसे गैंग की कमजोरी को भी उजागर करती है जो हथियारों के दम पर पुलिस को भी चुनौती देने में नहीं हिचक रहे थे। जिले में हथियारबंद गैंग की गतिविधियों पर यह बड़ी चोट मानी जा रही है।

मंगलवाड़ थाना पुलिस का मानना है कि आगे की पूछताछ से चोरी की गाड़ियों, हथियारों के स्रोत और गैंग की पूरी नेटवर्किंग के बारे में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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