40 साल पुरानी लदान-प्रथा अचानक बंद: चन्देरिया फैक्ट्री में श्रमिकों का धैर्य टूटने लगा
डीएस सेवन न्यूज़ चित्तौड़गढ़ चन्देरिया स्थित बिरला सीमेंट फैक्ट्री में इन दिनों माहौल शांत जरूर दिख रहा है, लेकिन भीतर ही भीतर असंतोष की आग तेज़ होती जा रही है। पेकिंग प्लांट के लदान श्रमिकों ने आरोप लगाया है कि लगभग चार दशकों से चल रही जिस कार्य–प्रथा पर उनकी आजीविका टिकी थी, उसे प्रबंधन ने बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक खत्म कर दिया।
श्रमिकों का कहना है कि यह सिर्फ एक व्यवस्था का बदलाव नहीं, बल्कि उनकी मेहनत से अर्जित स्थिर आय पर सीधा असर है। कई सालों से हर ठेकेदार और प्रबंधन द्वारा स्वीकार की गई लदान भुगतान-प्रणाली अचानक रोक दी गई, जिससे श्रमिकों की कमाई में भारी गिरावट आई है।
नोटिस देकर जताया विरोध
श्रमिकों ने HR/IR विभाग और वर्तमान ठेका फर्म सुशील एंड कंपनी को लिखित नोटिस भेजकर स्पष्ट कर दिया है कि यह निर्णय न केवल असहमति के साथ लिया गया है, बल्कि कानूनन भी गलत है।
नोटिस में Section 9A, Industrial Disputes Act का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि किसी भी स्थापित सेवा-शर्त में बदलाव करने से पहले 21 दिन की सूचनात्मक प्रक्रिया अनिवार्य होती है—जिसे प्रबंधन ने पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया।
श्रम विभाग में औपचारिक शिकायत
मामले को गंभीर बताते हुए श्रमिकों ने सहायक श्रम आयुक्त (ALC) चित्तौड़गढ़ को भी शिकायत भेजी है। श्रमिकों के अनुसार, यह कदम न केवल उनकी स्थापित शर्तों का उल्लंघन है, बल्कि “अनुचित श्रम व्यवहार” की श्रेणी में भी आता है।
श्रम विभाग से उम्मीद है कि दोनों पक्षों को जल्द ही चर्चा के लिए बुलाया जाएगा, ताकि विवाद को प्रारंभिक स्तर पर ही सुलझाया जा सके।
हल न मिलने पर आंदोलन का संकेत
श्रमिकों ने साफ कहा है कि यदि प्रबंधन ने कुछ दिनों में समाधान नहीं दिया, तो वे चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेंगे—सामूहिक प्रतिनिधिमंडल से शुरुआत करते हुए शांतिपूर्ण धरना और उच्च श्रम अधिकारियों तक अपील तक की कार्रवाई शामिल होगी।
फिलहाल सभी की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि प्रबंधन अगला कदम क्या उठाता है—क्योंकि फैक्ट्री में रोज़मर्रा की गूंज इस एक फैसले से पहले ही धीमी पड़ चुकी है।
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