उदयपुर एबीवीपी कार्यकर्ताओं से बहस के बाद प्रिंसिपल हटाया स्कूटी वितरण में लापरवाही को लेकर प्रदर्शनकारियों ने ऑफिस में किया बंद

डीएस सेवन न्यूज उदयपुर के एमजी कॉलेज में हाल ही में हुए छात्र आंदोलन और प्रशासनिक विवाद के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े कार्यकर्ताओं और छात्राओं के साथ हुई तीखी बहस के मामले में कॉलेज के प्रिंसिपल दीपक माहेश्वरी को पद से हटाकर एपीओ किया गया है। कॉलेज शिक्षा आयुक्त ओपी बैरवा के आदेश पर उन्हें मुख्यालय में उपस्थिति देने के निर्देश दिए गए हैं।

तीन दिन पहले कॉलेज परिसर में उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया था, जब परीक्षा परिणामों में कथित अनियमितताओं और छात्राओं को मिलने वाली स्कूटी के वितरण में देरी को लेकर एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन शुरू किया। आरोप है कि बातचीत के दौरान स्थिति इतनी बिगड़ गई कि प्रदर्शनकारियों ने प्रिंसिपल को उनके ही चैंबर में रोक लिया। बाद में पुलिस की समझाइश से मामला शांत कराया गया और कॉलेज का मुख्य गेट व चैंबर खोला गया।
छात्राओं का कहना है कि वे अपनी समस्याएं लेकर शांतिपूर्वक प्रिंसिपल से मिलने गई थीं, लेकिन वहां से उन्हें निराशा और अपमान का सामना करना पड़ा। छात्राओं और कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान उनके लिए आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया, जिससे आक्रोश और बढ़ गया। छात्र संगठन का कहना है कि शैक्षणिक संस्थान में इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है।

प्रदर्शन कर रही छात्राओं ने यह भी सवाल उठाए कि मेधावी छात्राओं के लिए स्वीकृत स्कूटियां वर्षों बाद भी वितरित क्यों नहीं की गईं। साथ ही कुछ विषयों में बड़ी संख्या में छात्राओं को फेल किए जाने और पुनर्मूल्यांकन के नाम पर अवैध राशि मांगने के आरोप भी लगाए गए। इन मुद्दों को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आ रही थीं, लेकिन समाधान नहीं हुआ।
वहीं, प्रिंसिपल दीपक माहेश्वरी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनके खिलाफ पूर्व नियोजित तरीके से प्रदर्शन कराया गया। उनका कहना है कि छात्राओं से अभद्र भाषा का प्रयोग करने जैसे आरोप निराधार हैं और वे विभाग के आदेशों का पालन करेंगे।

फिलहाल, इस कार्रवाई के बाद कॉलेज प्रशासन और छात्र समुदाय के बीच माहौल पर सबकी नजरें टिकी हैं। उच्च शिक्षा विभाग की इस पहल को छात्र हितों से जुड़ा अहम कदम माना जा रहा है, वहीं आगे की जांच और निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।

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