चित्तौड़गढ़ जिले की 7 निकायों में चुनावी बिगुल: 9 और 11 सितंबर को मतदान, निम्बाहेड़ा समेत सभी निकायों का चरण तय

चित्तौड़गढ़ जिले में निकाय चुनाव दो चरणों में, 9 और 11 सितंबर को मतदान
डीएस सेवन न्यूज चित्तौड़गढ़। राजस्थान में लंबे समय से निकाय चुनाव का इंतजार कर रहे राजनीतिक दलों और चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे दावेदारों के लिए चुनावी तस्वीर साफ हो गई है। राज्य में निकाय चुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं और आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। इसके साथ ही स्थानीय निकाय क्षेत्रों में विकास कार्यों के उद्घाटन, शिलान्यास सहित कई राजनीतिक गतिविधियों पर रोक रहेगी।

चित्तौड़गढ़ जिले की 7 नगर निकायों में चुनाव दो चरणों में होंगे। चुनाव आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार जिले की तीन निकायों में प्रथम चरण में 9 सितंबर को मतदान होगा, जबकि चार निकायों में द्वितीय चरण में 11 सितंबर को मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। दोनों चरणों की मतगणना 14 सितंबर को होगी और इसी दिन चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे।

प्रथम चरण में इन तीन निकायों में मतदान

चित्तौड़गढ़ जिले में प्रथम चरण के तहत नगर परिषद चित्तौड़गढ़, नगर पालिका बेगूं और नगर पालिका रावतभाटा में चुनाव होंगे। नगर परिषद चित्तौड़गढ़ में 60 वार्ड, नगर पालिका बेगूं में 35 वार्ड और नगर पालिका रावतभाटा में 40 वार्ड हैं। इस चरण में कुल 135 वार्डों में मतदान कराया जाएगा।

द्वितीय चरण में चार निकायों की बारी

द्वितीय चरण में नगर परिषद निम्बाहेड़ा, नगर पालिका बड़ी सादड़ी, नगर पालिका आकोला और नगर पालिका कपासन में चुनाव होंगे। इनमें नगर परिषद निम्बाहेड़ा के 45 वार्ड, नगर पालिका बड़ी सादड़ी के 25 वार्ड, नगर पालिका आकोला के 20 वार्ड और नगर पालिका कपासन के 25 वार्ड शामिल हैं। इस चरण में कुल 115 वार्डों में मतदान होगा।

इस तरह जिले की सभी 7 नगर निकायों के कुल 250 वार्डों में दो चरणों में मतदान कराया जाएगा। प्रथम चरण में 135 और द्वितीय चरण में 115 वार्ड शामिल हैं।

चुनाव खर्च की अधिकतम सीमा भी तय

चुनाव आयोग के दस्तावेज में प्रत्याशियों के लिए अधिकतम चुनाव खर्च की सीमा भी निर्धारित की गई है। इसके अनुसार नगर निगम के पार्षद के लिए 3 लाख 50 हजार रुपए, नगर परिषद के पार्षद के लिए 2 लाख 50 हजार रुपए और नगर पालिका सदस्य के लिए 1 लाख 50 हजार रुपए तक चुनाव खर्च की सीमा निर्धारित है।

चुनाव कार्यक्रम सामने आने के साथ ही स्थानीय राजनीति में हलचल बढ़ने लगी है। विभिन्न राजनीतिक दलों के संभावित प्रत्याशी टिकट की दौड़ में सक्रिय होंगे। वार्डों की स्थिति और स्थानीय समीकरणों को देखते हुए दावेदारों ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। राजनीतिक दलों में संभावित प्रत्याशियों को लेकर बैठकों और मंथन का दौर शुरू होने की संभावना है।

चुनाव की घोषणा के साथ लागू हुई आदर्श आचार संहिता के कारण नगर निकाय क्षेत्रों में नए विकास कार्यों की घोषणा तथा उद्घाटन-शिलान्यास जैसी गतिविधियों पर रोक रहेगी। ऐसे में चुनाव से पहले सक्रिय नजर आ रहे जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नेताओं को अब अपनी राजनीतिक गतिविधियां चुनावी नियमों के दायरे में रखनी होंगी।

21 सितंबर को सभापति, 22 सितंबर को उपसभापति का चुनाव

निकाय चुनाव के बाद सभापति पद के लिए 21 सितंबर को मतदान होगा, जबकि उपसभापति पद के लिए 22 सितंबर को मतदान कराया जाएगा। निर्वाचित पार्षदों के बीच बहुमत जुटाने को लेकर इन दोनों दिनों में स्थानीय राजनीति में खास हलचल देखने को मिल सकती है।

चित्तौड़गढ़ जिले में अब चुनावी गतिविधियों का केंद्र पहले चरण में होने वाली तीन निकायों और दूसरे चरण में शामिल चार निकायों पर रहेगा। प्रत्याशियों की दावेदारी, राजनीतिक दलों की टिकट रणनीति और वार्ड स्तर पर बनते समीकरण आने वाले दिनों में चुनावी माहौल को और गर्म करेंगे।

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