इस बार रक्षाबंधन पर बहनों को मिला अद्वितीय उपहार, भद्रा की परछाई भी नहीं पड़ेगी पर्व पर; 297 वर्षों बाद बन रहा दिव्य संयोग
DS7NEWS NETWORK | विशेष रिपोर्ट
डीएस सेवन न्यूज रक्षाबंधन का पावन त्योहार इस वर्ष 9 अगस्त को श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाएगा। इस बार का रक्षाबंधन न केवल भावनाओं से भरा होगा, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत विशेष रहने वाला है। 297 वर्षों बाद ऐसा संयोग बन रहा है, जो इस पर्व को और भी शुभ, दुर्लभ और आध्यात्मिक बना देता है।
इस बार की खास बात यह है कि पूरे दिन भद्रा काल अनुपस्थित रहेगा, जिससे बहनें बिना किसी कालविलंब के दिनभर अपने भाइयों को राखी बांध सकेंगी। पिछले कई दशकों में यह अवसर कम ही देखने को मिला है, जब रक्षाबंधन पूर्णिमा पर भद्रा की बाधा न रही हो।
क्या है इस बार का विशेष संयोग?
🔸 शनिवार का दिन – 9 अगस्त को यह पर्व शनिवार को पड़ रहा है, जो कर्मफलदाता शनि देव को समर्पित है।
🔸 श्रवण नक्षत्र – इस दिन चंद्रमा मकर राशि में स्थित रहेंगे और श्रवण नक्षत्र का प्रभाव रहेगा।
🔸 सौभाग्य योग – इस विशेष योग के स्वामी ब्रह्मा हैं और नक्षत्र के अधिपति भगवान विष्णु माने जाते हैं।
यानी एक ही दिन ब्रह्मा, विष्णु और शनि की विशेष उपस्थिति में यह पर्व मनाया जाएगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसे योग में रक्षासूत्र बांधना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा प्राप्त करने का माध्यम भी बन जाता है।
ग्रामीण इलाकों और दूर-दराज की बहनों के लिए बड़ी राहत
भद्रा नहीं होने के कारण अब उन्हें समय की पाबंदी का डर नहीं रहेगा। यात्रा करके भाइयों तक पहुंचने वाली बहनों के लिए यह दिन अब पूरी तरह से सुविधाजनक और शुभ रहेगा।
DS7 विशेष विश्लेषण:
यह रक्षाबंधन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि एक संयोगों की श्रृंखला है जो सदियों में एक बार आती है।
ऐसे में यह दिन सिर्फ राखी का त्योहार नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर एक श्रेष्ठ अवसर बन गया है।
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