चित्तौड़गढ़ चंदेरिया गरीब ठेला लगाए तो अतिक्रमण, अमीर इमारत बनाए तो विकास यही है चंदेरिया की कहानी”अतिक्रमण पर चला बुलडोजर


डीएस सेवन चित्तौड़गढ़ चंदेरिया के लोग टूटी-फूटी सड़कों और लगातार उठती धूल से तंग हैं। मगर जब वे सुरक्षा और मरम्मत की माँग उठाते हैं, प्रशासन का फोकस सड़क सुधार पर नहीं—बल्कि सड़क किनारे रोजगार के लिए बैठने वाले गरीबों के हटाने पर केंद्रित दिखता है। स्थानीयों की नजर में यह कार्रवाई समस्या का समाधान नहीं, बल्कि उनकी आवाज़ को दबाने का तरीका बनती जा रही है।

हालांकि, प्रशासन का पक्ष कुछ अलग है। अधिकारियों का कहना है कि अतिक्रमण हटाना विकास प्रक्रिया का हिस्सा है, ताकि सड़क चौड़ीकरण, ड्रेनेज और अन्य सार्वजनिक कार्य बिना बाधा पूरे हो सकें। प्रशासन के मुताबिक, “विकास कार्य तभी संभव हैं जब सड़क किनारे से अतिक्रमण हटाया जाए, क्योंकि कई जगह निर्माण कार्य ठप पड़े हैं।


स्थानीय निवासी बताते हैं कि दिन-भर धूल और गड्ढों से जूझते हुए भी जिन स्थानों पर रोज़गार मिलता है, उन जगहों से ही हटाने के आदेश दिए जाते हैं। सरकार या निगम की ओर से सड़क सुधार संबंधी ठोस योजना का अभाव होने पर जनता का रोष बढ़ रहा है। वहीं, शहर के बीचोंबीच कई बहुमंजिला इमारतें बिना अनुमतियों के उभर रही हैं, जिन पर अक्सर कार्रवाई नहीं देखने को मिलती — इस असमान अनुपालन ने जनता में गहरी नाराज़गी पैदा कर दी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कहना है कि अतिक्रमण की परिभाषा अगर केवल जरूरतमंदों के ठेलों और झोपड़ियों तक सीमित रहे, जबकि बड़े निर्माण और औद्योगिक अतिक्रमण पर ढिलाई बरती जाए, तो यह न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है। एक स्थानीय व्यापारी ने कहा, “जब सड़क नहीं बनेगी तो लोग वहीं बैठकर अपनी रोज़ी-रोटी चलाएँगे — उन्हें हटाने से समस्या हल नहीं होगी। पहले आवश्यक सुविधाएँ दें, फिर नियम लागू करें।”

कानून विशेषज्ञों का भी मत है कि नियम लागू करते समय पारदर्शिता और समानता आवश्यक है। यदि किसी क्षेत्र में नियमों के पालन में ढिलाई दिखाई देती है तो नागरिक अपेक्षा करते हैं कि प्रशासन उस ओर भी नजर रखे और समान रूप से कार्रवाई करे। वरना यह कार्रवाई दमन का रूप ले लेती है, न कि शहरी विकास की दिशा में कदम।

नागरिकों की मांग है कि पहले सड़कों की मरम्मत और धूल नियंत्रण के ठोस कदम उठाए जाएँ—जिनसे उनकी रोज़मर्रा की परेशानी कम हो—और साथ ही अतिक्रमण के मामलों की निवार्था करते समय अमीरों तथा बड़े उद्योगों द्वारा किए गए सम्भावित उल्लंघनों की भी पारदर्शी जाँच हो। तभी बस वास्तविक विकास और न्याय दोनो की बात कही जा सकती है

DS7NEWS NETWORK 

Post a Comment

Previous Post Next Post