एक पेड़ माँ के नाम अभियान के बीच बड़ा सवाल: बिनोता स्कूल में हरे पेड़ों की कटाई को किसने दी अनुमति?
डीएस सेवन न्यूज चित्तौड़गढ़ बिनोता (निंबाहेड़ा उपखंड)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाए जा रहे “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के दौरान बिनोता गांव के सरकारी माध्यमिक विद्यालय में पेड़ों की कटाई को लेकर उठा विवाद अब केवल विरोध प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और अनुमति व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
सोमवार को इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीणों ने स्कूल प्रशासन और प्रधानाचार्य के खिलाफ जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। धरना सुबह 9 बजे शुरू हुआ, जो लगातार शाम 4 बजे तक जारी रहा। बड़ी संख्या में ग्रामीण स्कूल परिसर के गेट पर डटे रहे और “हमें कार्रवाई चाहिए” के नारे लगाते रहे। ग्रामीणों का कहना था कि वे 4 से 5 घंटे तक धरने पर बैठे रहे, लेकिन प्रधानाचार्य उनसे मिलने या बातचीत करने तक नहीं आए, जिससे आक्रोश और बढ़ता गया।
पेड़ों की कटाई और अनुमति पर सवाल
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शिक्षा विभाग या उसके अधिकारी किसी सरकारी स्कूल में लगे हरे-भरे पेड़ों को काटने की अनुमति दे सकते हैं?
यदि अनुमति दी गई है, तो वह किस अधिकारी ने, किस नियम के तहत और किस लिखित आदेश से दी—यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है।
सरपंच ईश्वर लाल मीणा ने आरोप लगाया कि पेड़ काटने से पहले न तो ग्राम पंचायत को सूचना दी गई और न ही ग्रामवासियों को विश्वास में लिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानाचार्य हीरालाल लोहार ने बिना किसी सार्वजनिक सूचना के वर्षों पुराने नीम, गुलमोहर सहित अन्य पेड़ों को कटवा दिया।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कटे हुए पेड़ों की लकड़ी क्रेन मशीन की मदद से ट्रैक्टर और ट्रक में भरकर बाहर भेजी गई। प्रदर्शन में शामिल बुजुर्गों ने कहा कि इन पेड़ों को उन्होंने वर्षों तक पानी पिलाकर बड़ा किया था और उनका इस तरह काटा जाना ग्रामीणों की
भावनाओं के साथ खिलवाड़ है।
DS7 News की ग्राउंड रिपोर्ट
जब डीएस सेवन न्यूज़ की टीम मौके पर पहुंची, तो स्कूल परिसर में सूखे पेड़ों के साथ-साथ हरे पेड़ भी कटे हुए पाए गए। यही बिंदु अब पूरे विवाद की जड़ बनता नजर आ रहा है, क्योंकि एक ओर प्रधानाचार्य केवल सूखे पेड़ काटने की बात कह रहे हैं, वहीं मौके की स्थिति कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
प्रशासन और शिक्षा विभाग का रुख
धरने की सूचना पहले से होने पर पुलिस प्रशासन मौके पर मौजूद रहा। बाद में ब्लॉक शिक्षा अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से वार्ता की। उन्होंने आश्वासन दिया कि पूरे मामले की जांच के लिए समिति गठित की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि ग्रामीण इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं दिखे। ग्रामीणों की मांग है कि यदि पेड़ काटने की अनुमति ली गई थी, तो उसकी लिखित प्रति सार्वजनिक की जाए। साथ ही प्रधानाचार्य को निलंबित करने की मांग भी उठाई गई। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो धरना जारी रहेगा और स्कूल में ताला लगाने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
प्रधानाचार्य का पक्ष
डीएस7 न्यूज़ से बातचीत में प्रधानाचार्य हीरालाल लोहार ने कहा कि उन्होंने किसी भी हरे पेड़ को नहीं कटवाया है। उनके अनुसार केवल सूखे पेड़ों की ही कटाई की गई है और पूरी प्रक्रिया नियमानुसार की गई। उन्होंने इस विषय पर फिलहाल और कुछ कहने से इनकार किया।
अब असली सवाल
क्या नियमों की अनदेखी कर स्कूल परिसरों में हरे पेड़ काटे जा सकते हैं?
और अगर काटे गए हैं, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
ग्रामीणों ने शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर शीघ्र कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग जांच के बाद केवल आश्वासन देता है या वास्तव में कोई ठोस कार्रवाई करता है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि
यदि पेड़ काटने की अनुमति ली गई थी, तो उसकी लिखित प्रति सार्वजनिक की जाए।
यदि बिना अनुमति हरे पेड़ काटे गए हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
प्रधानाचार्य को निलंबित किए जाने की मांग भी उठी है
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे धरना जारी रखेंगे और जरूरत पड़ी तो स्कूल में ताला लगाने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
अब असली सवाल क्या हैंअब सवाल केवल धरने या प्रदर्शन का नहीं है, बल्कि उससे कहीं बड़ा है—
क्या सरकारी स्कूल परिसरों में नियमों की अनदेखी कर हरे पेड़ काटे जा सकते हैं?
यदि ऐसा हुआ है, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
क्या जांच केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी या वास्तव में कोई ठोस कार्रवाई सामने आएगी?
ग्रामीणों ने शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर शीघ्र और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।
अब निगाहें शिक्षा विभाग पर टिकी हैं कि वह जांच के बाद केवल आश्वासन देता है या फिर इस पूरे मामले में जवाबदेही तय कर कोई ठोस कदम उठाता है
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