कलेक्ट्रेट घेराव से पहले करणी सेना को पुलिस ने रोका जीवनसिंह शेरपुर बोले— “कलेक्टर जनता से दूर क्यों? बीजेपी ज्वाइन करें”

रतलाम में सड़क पर अड़ी आवाज: कलेक्ट्रेट पहुंचने से पहले ही रोका गया काफिला, 11 मांगों पर टकराव तेज
डीएस सेवन न्यूज मध्यप्रदेश के रतलाम में मंगलवार दोपहर एक बड़ा प्रशासनिक टकराव देखने को मिला, जब करणी सेना परिवार के कार्यकर्ता अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ रहे थे। लेकिन शहर में प्रवेश से पहले ही पुलिस ने उन्हें रोक दिया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे जनता से जुड़े मुद्दों को सीधे कलेक्टर के सामने रखना चाहते थे, जबकि प्रशासन कानून-व्यवस्था का हवाला देकर उन्हें आगे बढ़ने से रोकता रहा।

शहर के प्रमुख प्रवेश मार्गों के साथ-साथ महू-नीमच फोरलेन पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। बैरिकेड्स लगाकर प्रदर्शनकारियों को शहर से दूर ही रोक दिया गया। इस दौरान संगठन के प्रमुख जीवनसिंह शेरपुर ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि वे किसी राजनीतिक मकसद से नहीं बल्कि जनहित के मुद्दों को उठाने आए हैं।

करीब पांच घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन में प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत की कई कोशिशें हुईं, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। प्रदर्शनकारी लगातार इस बात पर अड़े रहे कि जब तक कलेक्टर मिशा सिंह स्वयं मौके पर आकर उनकी बात नहीं सुनतीं, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे। अधिकारियों ने समझाने की कोशिश की, लेकिन नाराज भीड़ ने नारेबाजी तेज कर दी।

प्रदर्शन के दौरान हालात तब और संवेदनशील हो गए, जब कुछ महिलाओं ने बैरिकेड्स हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की। महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक लिया, जिसके दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। इसी बीच एक महिला प्रदर्शनकारी बेहोश हो गई, जिसे तुरंत वाहन से अस्पताल के लिए रवाना किया गया।
जीवनसिंह शेरपुर ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी आवाज को दबाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर जनता की समस्याओं को रखने के लिए भी रास्ता रोका जाएगा, तो यह लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि गांवों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी विरोध तेज किया जाएगा।

इस पूरे घटनाक्रम की जड़ सात दिन पहले हुई एक कार्रवाई से जुड़ी है। जावरा क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्य में लगे दो डंपरों को खनिज विभाग ने अवैध परिवहन के आरोप में जब्त किया था। यह कार्रवाई विवाद का कारण बनी और इसके विरोध में पहले भी धरना दिया गया था। उसी के बाद कलेक्ट्रेट घेराव की रणनीति बनाई गई।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस प्रशासन पूरी तरह सक्रिय रहा। जिले के पुलिस अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए थे और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए तैनात रहे। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का गुस्सा लगातार बढ़ता दिखाई दिया।

प्रदर्शनकारियों की 11 प्रमुख मांगें:

1. अवैध उत्खनन के नाम पर निर्दोष लोगों पर कार्रवाई बंद की जाए


2. पिपलिया जोधा क्षेत्र में देह व्यापार पर सख्त रोक लगे


3. आमनेर में बालिका अपहरण मामले में त्वरित न्याय मिले


4. जिले में बढ़ती चोरी की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई हो


5. बोरवानी में अवैध ईंट भट्ठों को हटाया जाए


6. किसानों के कर्ज चुकाने की समय-सीमा बढ़ाई जाए


7. गेहूं खरीदी में आ रही समस्याओं का समाधान किया जाए


8. जावरा की आविका सिटी में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं


9. ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब बिक्री पर रोक लगे


10. प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए


11. जनसुनवाई व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए



कुल मिलाकर, यह प्रदर्शन सिर्फ एक संगठन का विरोध नहीं, बल्कि स्थानीय मुद्दों को लेकर बढ़ते असंतोष का संकेत बनता दिख रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गतिरोध को कैसे सुलझाता है और क्या प्रदर्शनकारियों की मांगों पर कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं।

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