उदयपुर में ACB का बड़ा एक्शन — वन विभाग की दबंगई का पर्दाफाश, 80 हजार की रिश्वत लेते 2 वनरक्षक गिरफ्तार
डीएस सेवन न्यूज़ उदयपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) डूंगरपुर यूनिट ने उदयपुर जिले के खेरवाड़ा क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए वन विभाग की कथित अवैध वसूली प्रणाली का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई के दौरान टीम ने दो वनरक्षकों को 80,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह मामला इस बात का सबूत बनकर सामने आया है कि किस तरह वैध रूप से कार्य करने वाले व्यापारियों को अनावश्यक दबाव में लेकर उनसे पैसों की उगाही की जा रही थी।
शिकायत के अनुसार परिवादी और उसका पार्टनर वर्षों से लाइसेंस प्राप्त लकड़ी व्यापार करते हैं। दोनों की गाड़ियों में निलगिरी और सेमल की लकड़ी भरी थी और सभी जरूरी दस्तावेज नियमों के अनुसार तैयार थे। इसके बावजूद 30 नवंबर की सुबह खेरवाड़ा रेंज स्थित कातरवास वन नाके पर वन विभाग के कर्मचारियों ने दोनों वाहनों को रोक लिया। परिवादी ने बताया कि वन अधिकारियों ने न तो कोई कार्रवाई की और न ही दस्तावेजों की गहराई से जांच, बल्कि सीधे गाड़ियों को ‘फँसाकर’ छोड़ने के बदले 80 हजार रुपये की मांग शुरू कर दी।
शिकायत मिलते ही ACB की टीम सक्रिय हुई और मामले का सत्यापन कराया गया। सत्यापन में स्पष्ट रूप से यह सिद्ध हो गया कि वनरक्षक महेश कुमार मीणा और विजेश अहारी रिश्वत की मांग कर रहे हैं। इसके बाद उप महानिरीक्षक प्रथम डॉ. रामेश्वर सिंह के सुपरविजन में और यूनिट प्रभारी रतन सिंह राजपुरोहित के नेतृत्व में ट्रैप टीम गठन किया गया। निर्धारित योजना के अनुसार ACB टीम ने कातरवास नाके पर दबिश दी और दोनों आरोपियों को रिश्वत की राशि लेते ही गिरफ्तार कर लिया।
ACB अधिकारियों का कहना है कि लकड़ी व्यापारी के सभी दस्तावेज सही पाए गए थे, ऐसे में वाहनों को रोकने का कोई वैधानिक आधार नहीं था। महानिदेशक पुलिस गोविंद गुप्ता ने बताया कि यह स्पष्ट रूप से अवैध वसूली का मामला है और गाड़ी रोकना सिर्फ दबाव बनाने का तरीका था। इस कार्रवाई ने वन विभाग में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि विभाग पर पहले भी इस तरह के अनावश्यक हस्तक्षेप और रोक-टोक के आरोप लगते रहे हैं।
स्थानीय व्यापारी वर्ग का कहना है कि इस प्रकार की जबरन वसूली वैध व्यापार करने वालों के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है। कई छोटे कारोबारी तो कार्रवाई के डर से अपनी बात भी सामने नहीं रख पाते। ACB की यह सख्त कार्रवाई क्षेत्र में भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। उम्मीद है कि भविष्य में ऐसे ऑपरेशनों के बाद ईमानदार व्यापारियों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी और विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी।
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