निंबाहेडा ऋण राशी का गबन करने के मामले में सहायक शाखा प्रबन्धक सहित 2 गिरफ्तार

निम्बाहेड़ा में करोड़ों की साज़िश का पर्दाफाश: सहायक शाखा प्रबंधक सहित दो गिरफ्तार, बाकी आरोपी फरार
डीएस सेवन न्यूज़ चित्तौड़गढ़, 07 दिसंबर।निम्बाहेड़ा में दिगम्बर कैपफिन कंपनी से जुड़ा एक बड़ा वित्तीय घोटाला उजागर हुआ है, जिसने स्थानीय स्तर पर कंपनी ग्राहकों के साथ हुए विश्वासघात की तस्वीर को साफ कर दिया है। कंपनी की ब्रांच में ही बैठकर कर्मचारियों के एक समूह ने न केवल ऋण वितरण की तय प्रक्रिया को तोड़ा, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से निर्दोष ग्राहकों की किस्त राशि तक हड़प ली। इसी गबन और धोखाधड़ी के मामले में कोतवाली निम्बाहेड़ा पुलिस ने सहायक शाखा प्रबंधक सत्यप्रकाश मालव और फील्ड ऑफिसर शंकरलाल मेघवाल को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि बाकी आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।

इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई, जब 20 सितंबर 2024 को जयपुर निवासी शिकायतकर्ता श्रीकांत बोहरा ने निम्बाहेड़ा थाने में विस्तृत रिपोर्ट दी। उन्होंने आरोप लगाया कि दिगम्बर कैपफिन ब्रांच निम्बाहेड़ा में कार्यरत सहायक शाखा प्रबंधक सत्यप्रकाश मालव, फील्ड ऑफिसर शंकरलाल मेघवाल, अनिल बंजारा, मोहम्मद अमान खान, पंकज कुमार कुम्हार और भरत लाल सिकलीगर ने मिलकर एक सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र रचा। रिपोर्ट के अनुसार, सभी आरोपियों ने अपनी-अपनी भूमिकाओं का गलत इस्तेमाल करते हुए 15 मई 2023 से 15 जुलाई 2024 तक स्वीकृत ऋण राशि को अनाधिकृत बैंक खातों में स्थानांतरित किया और कई ग्राहकों से वसूली गई किस्तों को कंपनी खाते में जमा ही नहीं करवाया।

शिकायत में बताई गई राशि भी छोटी-मोटी नहीं थी—कुल 20,73,772 रुपए की धोखाधड़ी और गबन का खुलासा हुआ। ऋण प्रक्रिया में गड़बड़ी से लेकर किस्त वसूली में किए गए साजिश भरे बदलाव इस बात का संकेत थे कि पूरी कार्रवाई काफी समय से चल रही थी और इसमें कई लोग शामिल थे।

जिला पुलिस अधीक्षक मनीष त्रिपाठी के निर्देश पर मामला गंभीरता से लिया गया और तत्काल अनुसंधान शुरू हुआ। एएसपी सरीता सिंह और डीएसपी निम्बाहेड़ा बद्रीलाल राव के सुपरविजन में थानाधिकारी रामसुमेर मीणा ने टीम गठित की। एएसआई अम्बालाल और जाप्ता प्रभारी कांस्टेबल प्रमोद व रामचन्द्र ने लगातार तकनीकी और मैदानी जांच कर आरोपियों की गतिविधियों को ट्रैक किया।

कई दिनों की जांच के बाद स्पष्ट हुआ कि स्वीकृत ऋण को सीधे फर्जी खातों में ट्रांसफर किया गया था और ग्राहकों से नकद या डिजिटल रूप से ली गई किस्तें कंपनी के बही खाते में दिखाए ही नहीं गईं। यही नहीं, कई मामलों में फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर ऋण फाइलें तैयार की गईं, ताकि प्रक्रिया का दुरुपयोग आसानी से हो सके।

प्राथमिक जांच में इन आरोपों की पुष्टि होने के बाद दो मुख्य आरोपियों—सत्यप्रकाश मालव और शंकरलाल मेघवाल—को गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों से पुछताछ के बाद पूरे नेटवर्क की भूमिका और स्पष्ट समझ में आई। बाकी आरोपी अब भी फरार हैं और पुलिस उनकी लोकेशन ट्रेस करने में जुटी है।
पुलिस का कहना है कि यह सिर्फ गबन का मामला नहीं, बल्कि ग्राहकों के भरोसे के साथ किया गया बड़ा अपराध है, जिसमें कई लोगों की वित्तीय स्थिति प्रभावित हुई है।

कोतवाली पुलिस ने आश्वासन दिया है कि इस नेटवर्क में शामिल हर व्यक्ति को कानून के दायरे में लाकर ही जांच पूरी की जाएगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।


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