मध्य प्रदेश नीमच 2 ट्रेन इंजनों की जोरदार भिड़ंत 4लोग घायल

डीएस सेवन न्यूज़ नीमच जिले के हिंोरिया फाटक के समीप  दोपहर हुए रेल हादसे ने पूरे इलाके को दहशत से भर दिया। दो ट्रेन इंजनों की आमने-सामने टक्कर इतनी जोरदार थी कि आसपास खड़े लोगों के कानों तक धमाके की आवाज़ गूंज उठी। देखते ही देखते ट्रैक के पास अफरा-तफरी का माहौल बन गया। धूल का गुबार, टूटे लोहे के हिस्से और चीख-पुकार के बीच स्थानीय लोग भागकर मौके पर पहुंचे और घायल कर्मचारियों को निकालने में जुट गए। इस पूरी घटना में चार लोग गंभीर रूप से घायल हुए जिन्हें तुरंत जिला चिकित्सालय पहुंचाया गया।

हादसे की शुरुआत उस वक्त हुई जब एक ट्रेन इंजन ट्रैक पर पहले से खड़ा था और दूसरा इंजन मंदसौर की ओर से रफ्तार के साथ आगे बढ़ रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मौके पर इशारा देने या अलर्ट करने जैसा कोई इंतजाम नजर नहीं आया। अचानक आते इंजन ने खड़े इंजन को टक्कर मार दी। झटके की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि दोनों इंजनों के आगे के हिस्से बुरी तरह चकनाचूर हो गए।

स्थानीय निवासी बसंत मालवीय, जो सबसे पहले दौड़कर घायलों तक पहुंचे, पूरी घटना का वर्णन करते हुए भावुक हो उठे। उनके अनुसार हादसे के समय दोनों इंजनों में पांच लोग मौजूद थे। चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि एक ड्राइवर अंदर ही फंसा रह गया। उन्होंने बताया कि टक्कर के बाद ड्राइवर सहित दो लोग वहीं गिर पड़े और कुछ पल के लिए तो ऐसा लगा मानो उनकी जान ही निकल गई हो। अफरातफरी मच गई, और मौके पर मौजूद युवकों ने बिना देर किए घायलों को बाहर निकालना शुरू किया।

बसंत मालवीय ने बताया कि इंजन के टकराने के बाद पेट्रोल लीक होना शुरू हो गया था। हालात ऐसे थे कि थोड़ी सी चिंगारी भी पूरे इंजन को आग के हवाले कर सकती थी। उन्होंने घबराए कर्मचारियों को तुरंत चेतावनी दी कि इंजन बंद करें और पेट्रोल लीक रोकें। स्थानीय लोगों ने बिना किसी सरकारी मदद के घायलों को संभाला, पानी दिया, स्ट्रेचर जैसा अस्थायी इंतजाम बनाया और उन्हें फाटक की बाउंड्री पार करवाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया।

गांव की एक अन्य महिला प्रत्यक्षदर्शी, बसंती मालवीय, ने बताया कि रेलवे ट्रैक तक पहुंचने का साफ रास्ता ही नहीं था। रेलवे के काम के कारण पूरे क्षेत्र में अवरोध लगे हुए थे। ऐसे में ग्रामीणों ने बड़ी मुश्किल से घायलों को उठाकर बाउंड्री पार करवाई। उन्होंने कहा कि अगर स्थानीय लोग मौजूद न होते, तो घायलों को अस्पताल पहुंचाने में और ज्यादा समय लग जाता और शायद स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के तुरंत बाद रेलवे कर्मचारियों का अमला मौके पर पहुंचना चाहिए था, लेकिन प्रशासन लगभग एक घंटे बाद पहुंचा। ग्रामीणों ने बताया कि जब वे घायलों को बचाने में जुटे थे, तब मौके पर पहुंचे कुछ जिम्मेदार लोगों ने उन्हें वहां से हटने और दूर रहने को भी कहा। इस बात से लोग नाराज़ भी हुए। उनका कहना था कि अगर वे डरकर पीछे हट जाते, तो दो लोगों की जान शायद बच ही नहीं पाती।

हादसे के बाद रेल मार्ग पर आवागमन प्रभावित हो गया। दोनों इंजनों के क्षतिग्रस्त होने के कारण ट्रैक पर मलबा जमा हो गया, जिसे हटाने में रेल विभाग के कर्मचारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। मौके पर पहुंचे अधिकारी घटना के कारणों की जांच में जुट गए हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों का मानना है कि यह हादसा मानवीय लापरवाही का नतीजा है — क्योंकि एक इंजन पहले से खड़ा था और दूसरा बिना पर्याप्त सिग्नल व्यवस्था के आगे बढ़ रहा था।

मौके से सामने आए मिले बयान बताते हैं कि हादसे ने लोगों की जान तो खतरे में डाली ही, साथ ही रेलवे की कार्यशैली और सुरक्षा प्रबंधन पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार प्रशासन का देर से पहुंचना, रास्तों का निर्माण कार्य के कारण अवरुद्ध होना, और स्थानीय लोगों को बचाव में शामिल होने से रोकना — ये सभी बातें भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए गंभीर चिंतन की मांग करती हैं।

हालांकि, इस भीषण हादसे की सबसे अलग तस्वीर यह रही कि जब तक प्रशासन मौके पर पहुंचता, उससे पहले ही स्थानीय लोग पूरी ताकत से घायलों को बचाने में जुट चुके थे। फाटक के आसपास के ग्रामीणों ने घायलों को संभालकर उन्हें अस्पताल पहुंचाने में जो तत्परता और मानवता दिखाई, वही इस पूरे घटनाक्रम की सबसे सकारात्मक और उम्मीद देने वाली झलक बनी।

रेल प्रशासन ने घटना की जांच शुरू कर दी है। दोनों इंजनों की तकनीकी स्थिति, चालक दल की जिम्मेदारी, सिग्नलिंग सिस्टम और ट्रैक की स्थिति से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिक गई हैं कि जांच रिपोर्ट क्या कहती है और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

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