मरुधरा की माटी से निकली सिनेमा की सच्ची आवाज़: ‘सागवान’
जहाँ वर्दी ने उठाई कैमरे की ज़िम्मेदारी और पर्दे पर उतरा सच
डीएस सेवन न्यूज़ उदयपुर राजस्थान की पहचान अब सिर्फ़ किले, लोकगीत और पर्यटन तक सीमित नहीं रही। इसी धरती से अब ऐसा सिनेमा जन्म ले रहा है, जो न सिर्फ़ मनोरंजन करता है बल्कि समाज को आईना दिखाने का साहस भी रखता है। फिल्म ‘सागवान’ इसी सोच का परिणाम है, जिसे पूरी तरह “सौ फीसदी राजस्थानी सिनेमा” कहा जा रहा है—नाम भर के लिए नहीं, बल्कि आत्मा से।
यह फिल्म किसी बड़े फिल्मी स्टूडियो की देन नहीं, बल्कि राजस्थान की मिट्टी, जंगलों और ज़मीनी अनुभवों से उपजी एक सच्ची कोशिश है। उदयपुर, धरियावद और प्रतापगढ़ के सागवान जंगलों में फिल्माई गई यह कहानी दर्शकों को चमक-दमक नहीं, बल्कि सच्चाई से रूबरू कराती है।
जब पुलिस अफ़सर बना फिल्मकार
‘सागवान’ की सबसे अलग और प्रभावशाली बात इसके नायक हैं—हिमांशु सिंह राजावत। वे रील लाइफ के हीरो नहीं, बल्कि असल ज़िंदगी में राजस्थान पुलिस में सीआईडी इंस्पेक्टर हैं। उन्होंने इस फिल्म में न केवल अभिनय किया है, बल्कि कहानी, संवाद और निर्देशन की कमान भी खुद संभाली है।
राजावत बताते हैं कि पुलिस सेवा के दौरान उन्होंने ऐसे कई मामले देखे, जहाँ अंधविश्वास, झाड़-फूंक और ढोंगी बाबाओं के चक्कर में निर्दोष लोग अपनी जान तक गंवा बैठे। उन्हीं अनुभवों ने ‘सागवान’ को जन्म दिया। यही कारण है कि फिल्म का हर सीन बनावटी नहीं, बल्कि बेहद वास्तविक लगता है।
अंधविश्वास बनाम सच की लड़ाई
फिल्म की कहानी वर्ष 2019 के एक सनसनीखेज़ अपराध से प्रेरित है, जहाँ एक हत्या की परतें धीरे-धीरे खुलती हैं और सामने आता है अंधविश्वास का खतरनाक चेहरा। जंगलों की रहस्यमयी पृष्ठभूमि में बुनी गई यह कहानी दर्शक को केवल डराती नहीं, बल्कि सोचने पर मजबूर करती है—क्या आज भी हम तर्क से ज़्यादा डर पर भरोसा करते हैं?
‘सागवान’ मनोरंजन के साथ-साथ समाज को चेतावनी देती है कि अंधविश्वास सिर्फ़ भ्रम नहीं, बल्कि जानलेवा हथियार भी बन सकता है।
हर स्तर पर राजस्थानी पहचान
निर्माताओं का दावा है कि यह फिल्म किसी भी एंगल से बाहरी नहीं है। कलाकारों से लेकर तकनीकी टीम तक, संगीत से लेकर लोकेशन तक—सब कुछ राजस्थान से जुड़ा है। संगीतकार ऐकार्थ पुरोहित और कपिल पालीवाल ने लोक और आधुनिक धुनों का ऐसा संगम रचा है, जो कहानी को और गहराई देता है।
बॉलीवुड का साथ, पर कहानी देसी
फिल्म में सयाजी शिंदे, मिलिंद गुणाजी, अहसान खान और रश्मि मिश्रा जैसे अनुभवी कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नज़र आएंगे। खास बात यह है कि इन कलाकारों ने बिना किसी स्टार सिस्टम के, राजस्थान की इस ज़मीनी कहानी पर भरोसा जताया।
रिलीज़ को तैयार एक साहसिक प्रयोग
‘सागवान’ को सेंसर बोर्ड से UA सर्टिफिकेट मिल चुका है। उदयपुर में हुए टीज़र लॉन्च कार्यक्रम में पुलिस और प्रशासन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे, जिन्होंने इस प्रयास को नई राह दिखाने वाला बताया।
जल्द ही सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही ‘सागवान’ सिर्फ़ एक फिल्म नहीं, बल्कि यह संदेश है कि राजस्थान अब कहानी सुनने वाला नहीं, कहानी गढ़ने वाला राज्य बन रहा है।
मरुधरा अब बोलेगी—अपने अंदाज़ में, अपने सच के साथ।
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