जयपुर गिरफ्तारी के बाद नहीं होगी बदनामी, राजस्थान पुलिस ने बदली सालों पुरानी परंपरा

डीएस सेवन न्यूज जयपुर राजस्थान में पुलिस व्यवस्था से जुड़ी एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल सामने आई है। अब किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसकी तस्वीरें सार्वजनिक नहीं की जाएंगी और न ही मीडिया के सामने उसकी परेड कराई जाएगी। यह फैसला राजस्थान हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद लागू किया गया है, जिसे पुलिस मुख्यालय ने तत्काल प्रभाव से अपनाने के आदेश जारी किए हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तारी किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं होती। जब तक अदालत द्वारा दोष सिद्ध न हो जाए, तब तक आरोपी को कानून की नजर में निर्दोष माना जाता है। इसी मूल भावना को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने आरोपी की गरिमा और निजता की रक्षा को प्राथमिकता दी है। एडीजी (कानून-व्यवस्था) हवा सिंह द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में साफ कहा गया है कि अब आरोपी को केवल कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश किया जाएगा।
नए निर्देशों के अनुसार, मीडिया को दी जाने वाली जानकारी में आरोपी की पहचान उजागर करने से यथासंभव बचा जाएगा। विशेष रूप से उन मामलों में जहां जांच प्रारंभिक स्तर पर हो, वहां नाम, पता या तस्वीर साझा नहीं की जाएगी। पुलिस का मानना है कि शुरुआती जांच के दौरान पहचान सार्वजनिक होने से निष्पक्ष जांच और व्यक्ति की सामाजिक स्थिति दोनों प्रभावित होती हैं।

पूर्व में कई मामलों में देखा गया था कि गिरफ्तारी के तुरंत बाद आरोपी की तस्वीरें मीडिया और सोशल मीडिया पर प्रसारित हो जाती थीं। इससे व्यक्ति और उसके परिवार को सामाजिक अपमान झेलना पड़ता था। कई बार बाद में अदालत से बरी होने के बावजूद आरोपी की छवि पर लगे दाग को मिटाना मुश्किल हो जाता था। इसी गंभीर पहलू को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने पुलिस की पुरानी कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी की थी।
पुलिस मुख्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि आरोपी की फोटो जारी करना और सार्वजनिक परेड कराना निजता के अधिकार का उल्लंघन है, जो संविधान द्वारा संरक्षित है। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट पहले भी इस विषय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश दे चुके हैं। हालांकि, गंभीर और संवेदनशील मामलों में कानून के दायरे में आवश्यक जानकारी साझा करने की अनुमति रहेगी, लेकिन अनावश्यक रूप से किसी की पहचान उजागर नहीं की जाएगी।

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