भीलवाड़ा दादागिरी करनी है तो नौकरी क्यों?”—हाईकोर्ट की प्रतापनगर SHO को कड़ी फटकार पत्रकार को धमकी मामले में सख्त रुख SHO को जिले से बाहर करने की अनुशंसा

दादागिरी करनी है तो नौकरी छोड़ो” — हाईकोर्ट की SHO को फटकार, पत्रकार धमकी मामले में सख्त आदेश
डीएस सेवन न्यूज जोधपुर/भीलवाड़ा। राजस्थान हाईकोर्ट ने भीलवाड़ा जिले के प्रतापनगर थाना प्रकरण में सख्त रुख अपनाते हुए थाना प्रभारी राजपाल सिंह को कड़ी फटकार लगाई है। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति फरजंद अली ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर दादागिरी ही करनी है तो नौकरी करने की जरूरत नहीं, गांव में खुले तौर पर घूमो। कोर्ट की इस टिप्पणी से पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है।

मामला 71 वर्षीय वरिष्ठ पत्रकार अनिल राठी को कथित रूप से दी गई धमकी और शिकायत पर कार्रवाई में लापरवाही से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया कि सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी से नाराज होकर SHO ने पत्रकार को फोन पर गाली-गलौच की और जान से मारने की धमकी दी। शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होने पर मामला हाईकोर्ट में पहुंचा।

सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच अधिकारी को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) और गृह सचिव को तत्काल हस्तक्षेप करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि किसी भी आम नागरिक के साथ गुंडों जैसा व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है।

अदालत ने SHO को एक सप्ताह के भीतर जिले से बाहर करने की अनुशंसा की है, साथ ही निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने पुलिस विभाग द्वारा 17 सीसी के तहत जारी नोटिस पर भी नाराजगी जताई और उसे 16 सीसी के तहत परिवर्तित करने के निर्देश दिए।

मामले की अगली सुनवाई 8 मई को निर्धारित की गई है, जिसके लिए विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की गई है। इससे पहले SHO को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दिए गए थे, जिनकी अवहेलना पर भी अदालत ने असंतोष जताया।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद भीलवाड़ा पुलिस प्रशासन में हलचल तेज हो गई है। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों को पुलिस जवाबदेही और कानून व्यवस्था के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है, जिससे भविष्य में ऐसे मामलों में लापरवाही पर अंकुश लगने की उम्मीद है

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