चित्तौड़गढ़ में झमाझम बारिश का सिलसिला जारी, मानसून की दस्तक करीब; डूंगला-भदेसर में रिकॉर्ड बरसात, 21 जून तक अलर्ट जारी

चित्तौड़गढ़ में मानसून पूर्व बारिश ने लोगों को गर्मी से राहत दी, 21 जून तक जारी रहने का अनुमान
डीएस सेवन न्यूज चित्तौड़गढ़, 18 जून 2025: चित्तौड़गढ़ जिले में मानसून से पहले की बारिश ने मौसम को सुहावना बना दिया है। बुधवार सुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे और रुक-रुक कर हुई बूंदाबांदी ने गर्मी से राहत दिलाई। शहरवासियों के लिए यह ठंडक भरा मौसम काफी सुकूनदायक रहा।  

डूंगला और भदेसर में सर्वाधिक बारिश  
जिले में डूंगला और भदेसर क्षेत्रों में सबसे अधिक वर्षा दर्ज की गई। डूंगला में 26 मिमी और भदेसर में 20 मिमी बारिश हुई। अन्य क्षेत्रों में भी अच्छी वर्षा दर्ज की गई:  
- गंगरार: 12 मिमी  
- निंबाहेड़ा: 9 मिमी  
- बड़ीसादड़ी: 10 मिमी  
- कपासन: 7 मिमी  
- बस्सी: 4 मिमी  
- भूपाल सागर: 5 मिमी  
- राशमी: 6 मिमी  
- बेगूं: 3 मिमी  
- भैंसरोडगढ़: 0 मिमी  

चित्तौड़गढ़ शहर में सुबह 8 बजे तक 8 मिमी बारिश दर्ज की गई।  

    बांधों में बढ़ा जल स्तर  
लगातार बारिश से जिले के बांधों में पानी की आवक शुरू हो गई है, जो आने वाले दिनों में सिंचाई और पेयजल आपूर्ति के लिए शुभ संकेत है। प्रमुख बांधों में हुई वर्षा:  
- बड़गांव बांध: 20 मिमी  
- बस्सी बांध: 14 मिमी  
- कपासन बांध: 13 मिमी  
- संदेसर: 10 मिमी  
- वागन: 7 मिमी  
- गंभीरी: 5 मिमी  
- मातृकुंडिया: 4 मिमी  
- औराई: 3 मिमी  
- भूपाल सागर: 0 मिमी  

   21 जून तक जारी रहेगी बारिश*
मौसम विभाग के अनुसार, चित्तौड़गढ़ में बारिश का सिलसिला 21 जून तक जारी रह सकता है। इस दौरान तेज हवाएं, बादलों की गर्जना और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना है। किसानों के लिए यह समय फायदेमंद साबित हो सकता है।  

जल्द पहुंचेगा मानसून, लू की संभावना नहीn
मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले 1-2 दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून चित्तौड़गढ़ में पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा, जिससे बारिश की तीव्रता बढ़ सकती है। अब जिले में लू चलने की कोई संभावना नहीं है और तापमान में और गिरावट आ सकती है।  

  निष्कर्ष
चित्तौड़गढ़ में मानसून पूर्व बारिश ने गर्मी से राहत दिलाई है और बांधों में जलस्तर बढ़ने से किसानों को भी राहत मिली है। अब सभी की निगाहें आने वाले मानसून पर टिकी हैं, जो जल्द ही जिले में दस्तक देने वाला है।  

 संपादकीय टिप्पणी
इस मौसमी बदलाव से न केवल गर्मी से राहत मिली है, बल्कि कृषि और जल संरक्षण के लिए भी यह एक सकारात्मक संकेत है।  

     सम्पादक: प्रियंका कुमावत
     DS7NEWS NETWORK

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