मरने के बाद मुझे खुश करना चाहते हों तो टीचरों को जेल करवा देना' शिक्षकों की पिटाई से आहत छात्र ने की आत्महत्या

टीचरों की पिटाई से आहत छात्र ने की आत्महत्या: "मरने के बाद मुझे खुश करना चाहते हों तो इन्हें जेल करवा देना"
डीएस सेवन न्यूज़ गुढ़ाचंद्रजी (करौली)। नौंवी कक्षा के छात्र अंकित (14) की आत्महत्या ने शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या स्कूल अनुशासन के नाम पर विद्यार्थियों पर शारीरिक अत्याचार जारी रहेगा? और क्या दोषी शिक्षक सिर्फ निलंबन या कार्रवाई के वादों में बचते रहेंगे?

अंकित के सुसाइड नोट में लिखा है—"मैं पत्र लिख रहा हूं, मेरे मां और पिता के लिए। वो मेरी मृत्यु के बाद मुझे खुश करना चाहते हों तो बाबूलाल बैरवा और शहंशाह को तीन साल जेल करवा देना।" नोट में उसने दो ही शिक्षकों को जिम्मेदार ठहराया, जिन पर परिवार ने हत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है।
जानकारी के अनुसार अंकित गुढ़ाचंद्रजी स्थित कमला शिक्षण संस्थान (KBSS) में पढ़ता था। मंगलवार को संस्था प्रधान भीम सिंह मीणा, शिक्षक बाबूलाल बैरवा और शहंशाह शेख ने उसकी पिटाई की। घर लौटने पर अंकित ने अपनी मां फोरन्ता देवी को यह बात बताई। शाम करीब 5.30 बजे घर के पीछे उसने फांसी लगाकर जान दे दी। परिजनों के मुताबिक छात्र के शरीर पर चोट के कई निशान मिले।

बुधवार सुबह परिजन और ग्रामीणों ने पुलिस चौकी व अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने स्कूल की मान्यता निरस्त करने और आरोपी शिक्षकों को तुरंत गिरफ्तार कर सख्त कानूनन कार्रवाई की मांग की। पिता मदन सिंह गुर्जर ने बताया कि अंकित मेधावी छात्र था और आठवीं तक प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुआ था।

अब बड़ा सवाल यह है कि—क्या शिक्षा संस्थान बच्चों को भविष्य गढ़ने की जगह भय और शारीरिक उत्पीड़न का केंद्र बन रहे हैं? और अगर सुसाइड नोट में सीधे नाम हैं, तो क्या दोषी शिक्षक बच निकलेंगे या उदाहरण पेश होगा?

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