चित्तौड़गढ़ बेगूं क्षेत्र में मानवता शर्मसारआंगनवाड़ी भवन के पास रोती मिली नवजात, पारसोली पुलिस ने लिया संरक्षण में

काटूंदा में मानवता शर्मसार: झाड़ियों में मिली 7 दिन की लावारिस नवजात, महिलाओं की सूझबूझ और पुलिस की तत्परता से बची मासूम की जान
डीएस सेवन न्यूज़ चित्तौड़गढ़/ बेगूं उपखंड के काटूंदा गांव में रविवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब आंगनवाड़ी भवन के पास झाड़ियों से 7 दिन की एक नवजात बालिका के जोर-जोर से रोने की आवाजें आने लगीं। राहगीर महिलाओं ने जब आवाजों की दिशा में देखा तो झटके से उनके कदम रुक गए। झाड़ियों के अंदर एक मासूम नवजात बालिका कपड़े में लिपटी, कांपती हुई और रोती हुई पड़ी थी, जिसे देखकर हर किसी का दिल पसीज गया।

ग्रामीण महिलाएँ बिना देर किए झाड़ियों में उतरीं और बच्ची को बाहर निकालकर अपने संरक्षण में ले लिया। मात्र 7 दिन की मासूम को इस हाल में देखकर गांव में मानवता को शर्मसार करने वाली यह घटना आग की तरह फैल गई। कुछ ही मिनटों में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्रित हो गए।

घटना की सूचना तुरंत पारसोली थाना पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही पारसोली थाना प्रभारी की अगुवाई में पुलिस टीम मौके पर पहुंची और नवजात बालिका को अपने कब्जे में लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य जांच के लिए काटूंदा चिकित्सालय पहुंचाया। चिकित्सकों ने जांच में बच्ची को पूरी तरह स्वस्थ बताया, जिसे देख सभी ने राहत की सांस ली।

इसके बाद पुलिस ने नवजात को बेहतर देखभाल के लिए जिला मुख्यालय पर एनआईसीयू भिजवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

इधर पारसोली पुलिस ने मामला दर्ज कर नवजात को जन्म देने वाली कुमाता की तलाश तेज कर दी है। पुलिस का मानना है कि बच्ची को देर रात या सुबह-सुबह किसी ने अंधेरे का फायदा उठाकर झाड़ियों में फेंका होगा। पुलिस आसपास के क्षेत्रों, अस्पतालों और प्रसव की संभावनाओं वाले घरों की जानकारी जुटा रही है।

इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी क्रूरता कभी किसी समाज का हिस्सा नहीं हो सकती। वहीं महिलाओं ने नवजात को बचाए जाने को "ईश्वर की इच्छा" बताते हुए राहत व्यक्त की है।

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