रोडवेज नौकरी का सपना बेचने वाला ‘कंडक्टर ठग’—कैसे एक भरोसे की सवारी ठगी की मंज़िल बन गई
डीएस सेवन न्यूज़ चित्तौड़गढ़ सरकारी नौकरी की चाहत रखने वाले युवाओं को लेकर अक्सर यह कहा जाता है कि वे मेहनत और उम्मीद के दम पर भविष्य की तरफ बढ़ते हैं। लेकिन कुछ लोग इसी उम्मीद को लालच में बदलकर अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर लेते हैं। चित्तौड़गढ़ में सामने आया ताज़ा मामला भी इसी हकीकत का एक कटु रूप है—जहां रोडवेज का ही एक कंडक्टर खुद को “सरकारी सेटिंग” का बड़ा खिलाड़ी बताकर लोगों के सपने निगलता रहा।
कोतवाली निम्बाहेड़ा थाना पुलिस ने अलवर निवासी रोडवेज कंडक्टर गिरीराज यादव को गिरफ्तार कर इस पूरे खेल का पर्दाफाश किया है। मामला सिर्फ पैसों की ठगी का नहीं, बल्कि उन मासूम उम्मीदों को तोड़ने का है जिन पर भरोसा करके लोग अपने परिवार के भविष्य की डोर थामे रहते हैं।
कैसे शुरू हुई धोखाधड़ी की कहानी
नाकोड़ा नगर, निम्बाहेड़ा की प्रसिद्ध भजन गायिका कीर्ति नागदा एक कार्यक्रम के लिए देवली जा रही थीं। सफर की शुरुआत कहीं आम लग रही थी, लेकिन रास्ते में शाहपुरा डिपो के उस रोडवेज कंडक्टर ने जो बातचीत शुरू की, वही बाद में ठगी की बुनियाद बन गई।
गिरीराज यादव ने टिकट काटते समय सामान्य बातचीत की, और फिर कार्यक्रम से जुड़ी बातें करते-करते उसने महिला के भरोसे का पहला धागा पकड़ लिया। बाद में लगातार फोन कॉल्स, मीठी बातें और सरकारी ऑफिस के अंदरूनी संपर्क होने के दावे उसे धीरे-धीरे अपने जाल में खींचते चले गए।
उसने दावा किया कि सचिवालय में उसके ‘फूफाजी’ बड़े पद पर हैं और सरकारी नौकरी के लेटर उन्हीं के आदेश से निकलते हैं। फिर बात सीधे नौकरी की सेटिंग पर आ गई—
“चार लाख में सरकारी नौकरी… दो लाख पहले, दो लाख पहली तनख्वाह के बाद।”
आकर्षक पैकेज, मजबूत दावा और अंदरूनी संपर्क का भ्रम—बस महिला और उनके परिचित भूपेश खत्री इस जाल में फंस गए।
पैसे कैसे लिए गए?
कीर्ति नागदा ने अपने पुत्र और भूपेश के पुत्र की नौकरी के लिए दस्तावेज गिरीराज को भेज दिए। इसके बाद शुरू हुआ रकम वसूलने का खेल—
1,57,000 रुपये UPI से,
और 3,60,000 रुपये नकद,
जो 06 जून 2024 को निम्बाहेड़ा के होटल पायल में आरोपी को सौंपे गए।
कुल मिलाकर 5,17,000 रुपये सपने पूरे होने की उम्मीद में दे दिए गए।
गिरीराज ने आश्वासन दिया कि आचार संहिता समाप्त होते ही नौकरी के आदेश हाथ में होंगे।
नौकरी लेटर का ‘नाटक’
8 जुलाई को गिरीराज ने उन्हें चित्तौड़गढ़ बस स्टैंड पर बुलाया—कथित नौकरी लेटर देने के लिए।
लेकिन वहां न कोई लेटर था और न ही “सेटिंग वाला कंडक्टर”!
कॉल्स उठने बंद, जवाबों में टालमटोल, और फिर पूरी तरह से संपर्क गायब।
तभी पता चला कि सपना बेचने वाला यह आदमी असल में एक ठग है।
थाना पुलिस की तत्परता—जाल से निकालकर जेल तक पहुंचाया
शिकायत न्यायालय में पहुंची, मामला पुलिस तक आया और एसपी मनीष त्रिपाठी ने तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए। एएसपी सरिता सिंह के निर्देशन में और डीएसपी बद्रीलाल राव की निगरानी में एएसआई विश्वजीत सहित टीम अलवर रवाना हुई।
टीम ने वहां से गिरीराज को डिटेन किया और सोमवार को थाने लाकर गहन पूछताछ की।
पूछताछ में उसने ठगी स्वीकार कर ली।
सोमवार को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। अब उससे यह भी जांच की जा रही है कि कहीं इस तरह उसने और लोगों को तो शिकार नहीं बनाया।
इस घटना का सबसे बड़ा संदेश
यह सिर्फ एक मामला नहीं, बल्कि एक बड़ी चेतावनी है—
सरकारी नौकरी की चाहत का फायदा उठाकर ठगे जाने का खतरा हर तरफ है।
दिलचस्प बात यह है कि ठग किसी बड़े पद पर नहीं था, बल्कि खुद रोडवेज का कंडक्टर था, जिसने अपनी ही ड्रेस और नौकरी को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया।
सिस्टम के भीतर होने का भ्रम देकर, अंदरूनी जान-पहचान का झांसा देकर, और सहज भरोसे का फायदा उठाकर ₹5.17 लाख का खेल खेल गया।
पुलिस कर रही है गहराई से जांच
फिलहाल आरोपी जेल में है।
मामले में यह भी जांच की जा रही है कि:
क्या उसके पीछे कोई बड़ा गिरोह तो नहीं?
क्या अन्य जिलों में भी उसने लोगों को ऐसे ही नौकरी का झांसा दिया?
क्या वास्तव में वह किसी अधिकारी का नाम लेकर लोगों को भ्रमित करता था?
समापन
यह केस बताता है कि सरकारी नौकरी की दौड़ में शॉर्टकट लेने का लालच अक्सर महंगा पड़ जाता है। मेहनत का रास्ता भले लंबा हो, पर सही होता है।
निम्बाहेड़ा पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने न सिर्फ एक ठग को पकड़ा, बल्कि कई और लोगों को भी किसी बड़े नुकसान से बचा लिया।
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