आदित्य सीमेंट प्लांट में श्रमिक की मौत से मचा हड़कंप, परिजनों ने प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप
डीएस सेवन न्यूज चित्तौड़गढ़ जिले के शंभूपुरा क्षेत्र में स्थित आदित्य सीमेंट प्लांट में एक श्रमिक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। इस घटना ने न केवल क्षेत्र में सनसनी फैला दी, बल्कि प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था और कार्यप्रणाली पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक की पहचान भदेसर थाना क्षेत्र के कन्नौज निवासी नरेंद्र (32) पिता ओमप्रकाश के रूप में हुई है, जो आदित्य सीमेंट प्लांट में कार्यरत था।
मृतक के बड़े भाई गोपाल ने बताया कि नरेंद्र शुक्रवार को शाम पांच बजे की शिफ्ट पूरी करने के बाद घर नहीं लौटा। परिजनों ने जब उससे संपर्क करने का प्रयास किया तो फोन नहीं लगा। इसके बाद रिश्तेदारों और परिचितों के यहां तलाश की गई, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। काफी देर बाद परिजन शंभूपुरा थाने पहुंचे, जहां उन्हें पता चला कि नरेंद्र को एंबुलेंस के जरिए जिला अस्पताल ले जाया गया है। परिजनों का आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान न तो कंपनी प्रबंधन और न ही ठेकेदार की ओर से कोई सूचना दी गई।
परिजनों का कहना है कि जब वे आदित्य सीमेंट प्लांट पहुंचे तो उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया और चुपचाप नरेंद्र को अस्पताल पहुंचा दिया गया। इस बात की जानकारी मिलते ही अस्पताल में बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन एकत्र हो गए, जिससे आक्रोश फैल गया। मृतक के भाई गोपाल ने बताया कि उन्हें यह कहा गया कि नरेंद्र ने फांसी लगाई है, लेकिन परिजन इस दावे को सिरे से खारिज कर रहे हैं। उनका आरोप है कि नरेंद्र पर पिछले कुछ दिनों से काम का अत्यधिक दबाव बनाया जा रहा था और नौकरी से निकालने की धमकियां भी दी जा रही थीं, जिसके कारण वह मानसिक तनाव में था।
घटना के बाद जिला चिकित्सालय में घंटों तक कोई जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी या कंपनी प्रबंधन का कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा। देर रात तक इंतजार करने के बावजूद जब कोई सुध लेने नहीं आया तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। नाराज ग्रामीणों और परिजनों ने आदित्य सीमेंट प्लांट की ओर कूच कर दिया। रात करीब बारह बजे सदर थाना सीआई प्रेम सिंह अस्पताल पहुंचे और परिजनों व ग्रामीणों से समझाइश की।
इस घटना ने आदित्य सीमेंट जैसे बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि कड़ी सुरक्षा और बड़ी संख्या में कर्मचारियों की मौजूदगी के बावजूद यदि ऐसी घटनाएं हो रही हैं तो सुरक्षा इंतजामों का औचित्य क्या रह जाता है। उल्लेखनीय है कि यह पहला मौका नहीं है जब प्लांट में किसी कार्मिक की मौत हुई हो, लेकिन इस मामले ने लोगों को गहराई से झकझोर दिया है।
देर रात तक जिला चिकित्सालय के आपातकालीन वार्ड के बाहर लोग फर्श पर बैठकर नारेबाजी करते रहे। “आदित्य सीमेंट हाय-हाय”, “न्याय दो न्याय दो” और “दोषी अधिकारियों को गिरफ्तार करो” जैसे नारों से माहौल गूंज उठा। आक्रोशित लोगों का कहना था कि घटना के कई घंटे बाद भी कंपनी प्रबंधन मौके पर नहीं पहुंचा और फोन बंद कर लिए गए। इसके बाद परिजन और ग्रामीण रात में ही फैक्ट्री गेट के बाहर धरने पर बैठ गए। घटना को लेकर क्षेत्र में तनाव बना हुआ है और लोग निष्पक्ष जांच व न्याय की मांग कर रहे
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