यूजीसी कानून के विरोध में उदयपुर में सवर्ण-ओबीसी समाज की संयुक्त बैठक, मेवाड़ से आंदोलन तेज करने का ऐलान
डीएस सेवन न्यूज उदयपुर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए प्रावधानों को लेकर विरोध की आवाजें तेज होती दिखाई दे रही हैं। इसी क्रम में उदयपुर के सेवाश्रम स्थित विप्र फाउंडेशन कार्यालय में सवर्ण और ओबीसी समाज की एक बड़ी संयुक्त बैठक आयोजित की गई, जिसमें मेवाड़ क्षेत्र में व्यापक आंदोलन चलाने की रूपरेखा पर विस्तार से मंथन हुआ। बैठक में विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर इस मुद्दे पर एकजुटता प्रदर्शित की।
बैठक में श्री राजपूत करणी सेना, विप्र फाउंडेशन, विप्र सेना, ब्रह्म शक्ति छात्र संघ, राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना, क्षत्रिय करणी सेना, बजरंग सेना, जैन समाज, लोहार समाज तथा काली कल्याण शक्ति पीठ सहित कई संगठनों की उपस्थिति रही। सभी प्रतिनिधियों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी कानून पर लगाई गई अंतरिम रोक का स्वागत करते हुए इसे जनभावना की जीत बताया। वक्ताओं ने कहा कि यह निर्णय संघर्ष कर रहे लोगों के मनोबल को मजबूत करने वाला है, लेकिन जब तक संबंधित कानून को पूरी तरह निरस्त नहीं किया जाता, तब तक विरोध जारी रहेगा।
बैठक में कई वक्ताओं ने अपने विचार रखते हुए कहा कि यह कानून समाज में विभाजन और जातिगत तनाव को बढ़ावा दे सकता है। उन्होंने इसे भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों, सनातन परंपरा और सामाजिक समरसता के प्रतिकूल बताया। वक्ताओं का कहना था कि ऐसे प्रावधानों से सामाजिक संतुलन प्रभावित हो सकता है, इसलिए इसे वापस लिया जाना आवश्यक है।
श्री राजपूत करणी सेना के उदयपुर संभाग प्रभारी डॉ. परमवीर सिंह दुलावत ने संबोधित करते हुए कहा कि 13 जनवरी 2026 को लागू किया गया यह कानून उन्हें इतिहास के रोलेट एक्ट की याद दिलाता है। उनके अनुसार, यह व्यवस्था समाज को बांटने का कार्य कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि देश को जिन विषयों पर सख्त कानूनों की आवश्यकता महसूस की जा रही थी, उनके बजाय इस प्रकार के प्रावधान लागू होने से असंतोष की स्थिति बनी है।
डॉ. दुलावत ने स्पष्ट किया कि आंदोलन केवल एक वर्ग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सर्व समाज की भागीदारी के साथ इसे मेवाड़ भर में आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सरकार ने इस कानून पर पुनर्विचार नहीं किया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
बैठक में आगे की रणनीति पर सहमति बनाते हुए निर्णय लिया गया कि जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। चरणबद्ध तरीके से धरना-प्रदर्शन, रैलियां और ज्ञापन सौंपने जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उपस्थित संगठनों ने सामूहिक रूप से कहा कि यह संघर्ष किसी एक समाज का नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और भविष्य की दिशा से जुड़ा विषय है। मेवाड़ से उठी यह आवाज अब व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने की तैयारी के साथ समाप्त हुई।
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