चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर बिगड़ती यातायात व्यवस्था जिम्मेदार बेखबर

हमारी विरासत, हमारी जिम्मेदारी: चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर बिगड़ती यातायात व्यवस्था बनी गंभीर समस्या
डीएस सेवन न्यूज़ चित्तौड़गढ़ विश्व प्रसिद्ध चित्तौड़गढ़ दुर्ग, जो भारत की शान और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है, आज अव्यवस्थित यातायात व्यवस्था के कारण गंभीर संकट से जूझ रहा है। दुर्ग पर पहुंचने वाले मार्गों पर आए दिन लगने वाला जाम अब आम बात हो गई है। इससे न केवल स्थानीय नागरिकों को परेशानी उठानी पड़ रही है, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक भी घंटों जाम में फंसने को मजबूर हैं। बढ़ती पर्यटक संख्या के अनुरूप ट्रैफिक व्यवस्था विकसित नहीं हो पाई है, जिससे हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।


दुर्ग क्षेत्र में अव्यवस्थित पार्किंग, संकरे मार्ग और यातायात नियंत्रण की कमी के कारण स्थिति दिन प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है। यह विषय कई बार समाचारों में भी सामने आ चुका है, बावजूद इसके जिम्मेदार विभागों और जनप्रतिनिधियों की ओर से ठोस कदम उठाए जाते नजर नहीं आ रहे। नतीजतन, यह समस्या अब केवल असुविधा नहीं बल्कि शहर की छवि से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुकी है।


इस पूरे मामले को लेकर पूर्व राज्यमंत्री एवं चित्तौड़गढ़ से कांग्रेस विधायक रहे वरिष्ठ नेता सुरेंद्रसिंह जाड़ावत ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2012-13 में उनके कार्यकाल के दौरान चित्तौड़गढ़ दुर्ग को वर्ल्ड हेरिटेज सूची में शामिल करवाया गया था, जिसके बाद यहां पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई। लेकिन इसके विपरीत, आधारभूत सुविधाओं और यातायात प्रबंधन पर उतना ध्यान नहीं दिया गया जितना दिया जाना चाहिए था।


पूर्व मंत्री जाड़ावत ने कहा कि वर्तमान में राज्य और केंद्र दोनों जगह भाजपा की सरकार होने के बावजूद दुर्ग क्षेत्र की इस गंभीर समस्या की अनदेखी की जा रही है। स्थानीय सांसद और विधायक द्वारा इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई, जबकि यदि सूरजपोल की ओर से वैकल्पिक मार्ग को सुचारू रूप से चालू कर दिया जाए तो काफी हद तक ट्रैफिक दबाव कम किया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधि केवल चुनाव के समय सक्रिय दिखाई देते हैं, उसके बाद समस्याओं से मुंह मोड़ लेते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि चित्तौड़गढ़ दुर्ग जैसे विश्व धरोहर स्थल पर इस तरह की अव्यवस्था बेहद दुखद है। विदेशी पर्यटक बड़ी उम्मीदों के साथ यहां आते हैं, लेकिन जाम और अव्यवस्था के कारण परेशान होकर लौटते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गलत संदेश जा रहा है। यह स्थिति विकास की बात करने वालों के दावों पर सवाल खड़े करती है।

शहरवासियों के बीच अब यह चर्चा आम हो गई है कि जब प्रशासन और जनप्रतिनिधि दोनों ही इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं, तो आखिर इस ऐतिहासिक धरोहर की जिम्मेदारी कौन लेगा। यातायात की यह समस्या अब विकराल रूप ले चुकी है और यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में हालात और भी बिगड़ सकते हैं।

चित्तौड़गढ़ दुर्ग केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि हमारी पहचान और गौरव है। इसकी व्यवस्था सुधारना सिर्फ प्रशासन की नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों की भी नैतिक जिम्मेदारी है। अब जरूरत है कि इस गंभीर समस्या को प्राथमिकता दी जाए और स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि हमारी विरासत सुरक्षित रह सके और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी गर्व का विषय बनी रहे।

Post a Comment

Previous Post Next Post