LPG संकट की आशंका के बीच ग्रामीण परिवारों को राहत: राजस्थान के लिए 29 लाख लीटर केरोसिन का आवंटन

वैश्विक हालात के बीच केंद्र का बड़ा फैसला: राजस्थान को 29 लाख लीटर केरोसिन आवंटित, जरूरतमंद परिवारों की रसोई चलाने पर फोकस
डीएस सेवन न्यूज अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े संभावित दबावों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए देश के विभिन्न राज्यों को केरोसिन का विशेष आवंटन किया है। इस निर्णय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी स्थिति में आम लोगों की रसोई प्रभावित न हो और जरूरतमंद परिवारों को खाना बनाने के लिए वैकल्पिक ईंधन उपलब्ध रह सके। लंबे समय बाद केरोसिन के इस अतिरिक्त आवंटन ने राज्यों को ऐसी स्थिति से निपटने का विकल्प दिया है, जब एलपीजी की उपलब्धता में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न हो सकती है।

सरकारी स्तर पर जारी निर्देशों के अनुसार देश के 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए कुल 48,240 किलोलीटर केरोसिन का आवंटन स्वीकृत किया गया है। इस पूरे आवंटन में राजस्थान को भी विशेष हिस्सा दिया गया है। आंकड़ों के अनुसार राजस्थान को करीब 2,928 किलोलीटर, यानी लगभग 29 लाख लीटर केरोसिन उपलब्ध कराया गया है। यह आवंटन वर्ष 2025-26 के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत किया गया है, जिससे जरूरतमंद परिवारों तक नियंत्रित तरीके से यह ईंधन पहुंच सके।

केंद्र सरकार का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा संसाधनों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में यदि किसी क्षेत्र में एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित होती है तो लोगों को कठिनाई का सामना न करना पड़े। इसी सोच के तहत केरोसिन को एक वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई परिवार ऐसे हैं जिनकी निर्भरता पारंपरिक ईंधन या सीमित संसाधनों पर रहती है। इसलिए सरकार ने इस योजना के तहत ग्रामीण इलाकों को प्राथमिकता देने का विकल्प भी राज्यों को दिया है।

पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से राज्यों के खाद्य सचिवों, स्टेट लेवल कोऑर्डिनेटर और संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में विस्तृत पत्र भेजा गया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि आवंटित केरोसिन का वितरण सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से ही किया जाएगा। साथ ही राज्यों को यह भी निर्देश दिया गया है कि इस ईंधन का उपयोग केवल घरेलू जरूरतों के लिए ही सुनिश्चित किया जाए और किसी भी प्रकार के दुरुपयोग को सख्ती से रोका जाए।

केंद्र सरकार ने खास तौर पर इस बात पर जोर दिया है कि केरोसिन का पेट्रोल या डीजल में मिलावट जैसे गलत कार्यों में इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। अतीत में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जब केरोसिन का अवैध तरीके से ईंधन में मिलावट के लिए उपयोग किया गया। इसलिए इस बार राज्यों को स्पष्ट रूप से जिम्मेदारी दी गई है कि वे वितरण और उपयोग की निगरानी करें और किसी भी अनियमितता पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करें।

राज्य सरकारों को यह भी अधिकार दिया गया है कि वे अपने क्षेत्र की जरूरतों के अनुसार केरोसिन के वितरण की मात्रा तय कर सकती हैं। यानी एक परिवार को कितना केरोसिन दिया जाएगा, यह निर्णय राज्य सरकार अपने स्तर पर कर सकती है। इससे स्थानीय परिस्थितियों और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बेहतर व्यवस्था बनाई जा सकेगी। खासतौर पर ऐसे क्षेत्रों में जहां एलपीजी सिलेंडर की नियमित आपूर्ति चुनौतीपूर्ण है, वहां यह कदम काफी उपयोगी साबित हो सकता है।

सरकार ने आवंटन के साथ एक समयसीमा भी तय की है। निर्देशों के अनुसार राज्यों को 45 दिनों के भीतर इस केरोसिन की लिफ्टिंग करनी होगी। यदि तय समय में इसे नहीं उठाया गया तो आगे इसे कैरी फॉरवर्ड नहीं किया जाएगा। यानी यह एक तरह से विशेष और सीमित अवधि का आवंटन है, जिसे मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए लागू किया गया है।

राजस्थान को दिए गए करीब 29 लाख लीटर केरोसिन को भी इसी नीति के तहत जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार अब यह तय करेगी कि किन क्षेत्रों में इसकी अधिक आवश्यकता है और किस प्रकार से इसका वितरण किया जाए। ग्रामीण इलाकों को प्राथमिकता देने की संभावना इसलिए भी ज्यादा मानी जा रही है क्योंकि वहां कई परिवारों के लिए केरोसिन अभी भी उपयोगी ईंधन माना जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें किसी भी आपात स्थिति में लोगों की बुनियादी जरूरतों को प्रभावित होने से बचाने की कोशिश की जाती है। रसोई गैस की आपूर्ति सामान्य बनी रहे, इसके लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन यदि कहीं अस्थायी कमी की स्थिति बनती है तो केरोसिन एक वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में काम कर सकता है।

कुल मिलाकर केंद्र सरकार का यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया फैसला माना जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य यही है कि किसी भी परिस्थिति में आम लोगों के घरों की रसोई बंद न हो और जरूरतमंद परिवारों को खाना बनाने के लिए आवश्यक ईंधन उपलब्ध रह सके। अब राज्य सरकारों पर यह जिम्मेदारी होगी कि वे इस आवंटन का सही तरीके से उपयोग करें और यह सुनिश्चित करें कि इसका लाभ वास्तव में उन परिवारों तक पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा आवश्यकता है।

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