चित्तौड़गढ़ मेवाड़ यूनिवर्सिटी विवाद गिरफ्तार 17 छात्रों को कोर्ट से जमानत, कार्रवाई पर उठे सवाल

मेवाड़ विश्वविद्यालय में हंगामा: 17 छात्रों की गिरफ्तारी के बाद विरोध तेज, जमानत पर रिहाई
डीएस सेवन न्यूज चित्तौड़गढ़ जिले के गंगरार क्षेत्र में स्थित मेवाड़ विश्वविद्यालय में बीएससी नर्सिंग पाठ्यक्रम को लेकर चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने 17 विद्यार्थियों को गिरफ्तार कर विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जेल भेज दिया था। हालांकि मंगलवार को न्यायालय के आदेश के बाद सभी विद्यार्थियों को जमानत मिल गई और रात करीब साढ़े आठ बजे उन्हें जिला कारागृह से रिहा कर दिया गया।

इन छात्रों की गिरफ्तारी के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) दोनों ही संगठनों ने कड़ा विरोध जताया। मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन कर विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस कार्रवाई के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय के कुलपति अशोक गदिया की गिरफ्तारी और विश्वविद्यालय पर कार्रवाई की मांग भी उठाई।

दरअसल वर्ष 2022 में मेवाड़ विश्वविद्यालय में कई विद्यार्थियों को बीएससी नर्सिंग पाठ्यक्रम में प्रवेश दिया गया था। उस समय विद्यार्थियों को बताया गया था कि इस पाठ्यक्रम को आवश्यक मान्यता प्राप्त है। इस जानकारी के आधार पर 50 से अधिक विद्यार्थियों ने इसमें प्रवेश ले लिया। लेकिन एक-दो सेमेस्टर बीतने के बाद विद्यार्थियों को पता चला कि पाठ्यक्रम की मान्यता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसके बाद छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब मांगा और विरोध शुरू हो गया।

छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय ने वेबसाइट और बोर्ड पर गलत जानकारी देकर उन्हें गुमराह किया। जब छात्रों ने मान्यता के संबंध में स्पष्ट जवाब मांगा तो विवाद बढ़ गया। हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए विश्वविद्यालय परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने 17 छात्रों को गिरफ्तार कर लिया और कई धाराओं में मामला दर्ज कर जेल भेज दिया।

छात्राओं का कहना है कि वे पिछले कई दिनों से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे थे, लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय प्रशासन ने पुलिस कार्रवाई कर दी। उनका आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें मानसिक रूप से भी काफी परेशान किया।

वहीं छात्र संगठनों का कहना है कि आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस का सहारा लिया गया और छात्रों पर झूठे मुकदमे दर्ज किए गए। हालांकि अदालत से जमानत मिलने के बाद छात्रों की रिहाई हो गई है, लेकिन पूरे मामले को लेकर अब भी विवाद बना हुआ है।


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