उदयपुर महावीर जयंती पर विशेष: अहिंसा और संयम का संदेश देती संगोष्ठी आयो

महावीर जयंती पर विशेष: अहिंसा और संयम का संदेश देती संगोष्ठी आयोजित
डीएस सेवन न्यूज उदयपुर जनमत मंच के तत्वाधान में महावीर जयंती के अवसर पर “अहिंसा के प्रचारक महावीर” विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। इस अवसर पर डॉ. श्रीनिवास महावर ने कहा कि महावीर जयंती जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म कल्याणक है, जो अहिंसा, शांति और संयम का प्रतीक माना जाता है। इस दिन प्रभात फेरी, शोभायात्रा और मंदिरों में विशेष पूजा के साथ “अहिंसा परमो धर्म:” का संदेश दिया जाता है, जो आत्म-शुद्धि, दया और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

भगवान महावीर स्वामी जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर थे, जबकि प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव माने जाते हैं। उनका जन्म 599 ईसा पूर्व बिहार के वैशाली स्थित कुंडग्राम में राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला के यहां हुआ था। बचपन में उनका नाम वर्धमान था। उन्होंने 30 वर्ष की आयु में सांसारिक जीवन त्यागकर ज्ञान प्राप्ति के लिए संन्यास ग्रहण किया और 12 वर्षों की कठोर तपस्या के बाद 42 वर्ष की आयु में कैवल्य ज्ञान प्राप्त किया।

मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार भारद्वाज ने बताया कि अहिंसा के तीन प्रकार—मन, वचन और कर्म—जैन धर्म का मूल आधार हैं। हेमंत कुमार डामोर ने जैन धर्म और प्रकृति के संबंध पर प्रकाश डाला। वहीं धर्मेंद्र कुमार वर्मा और आजाद कुमार मीणा ने जैन धर्म की शिक्षाओं में सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह और अहिंसा जैसे सिद्धांतों पर विशेष जोर दिया।

कार्यक्रम में डॉ. संजय कुमार मीणा, डॉ. जिज्ञासा पटीदार, हेमराज गुर्जर और डॉ. समा राम देवासी सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। मंच के सचिव शिरीष नाथ माथुर ने बताया कि जैन धर्म में सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चरित्र को त्रिरत्न माना गया है, जो मोक्ष प्राप्ति का मार्ग दर्शाते हैं। भगवान महावीर ने 72 वर्ष की आयु में 468 ईसा पूर्व पावापुरी में निर्वाण प्राप्त किया।

Post a Comment

Previous Post Next Post